लोग Poetry (page 57)

तिलिस्म-ए-गुम्बद-ए-बे-दर किसी पे वा न हुआ

अख़्तर होशियारपुरी

शाम तन्हाई धुआँ उठता बराबर देखते

अख़्तर होशियारपुरी

फिर ये हुआ कि लोग दरीचों से हट गए

अख़्तर होशियारपुरी

मिरी निगाह का पैग़ाम बे-सदा जो हुआ

अख़्तर होशियारपुरी

मिरी निगाह का पैग़ाम बे-सदा जो हुआ

अख़्तर होशियारपुरी

मैं ने यूँ देखा उसे जैसे कभी देखा न था

अख़्तर होशियारपुरी

दिल में इक जज़्बा-ए-बेदाद-ओ-जफ़ा ही होगा

अख़्तर होशियारपुरी

चेहरे के ख़द्द-ओ-ख़ाल में आईने जड़े हैं

अख़्तर होशियारपुरी

अपना साया भी न हम-राह सफ़र में रखना

अख़्तर होशियारपुरी

आँधी में चराग़ जल रहे हैं

अख़्तर होशियारपुरी

यूँ ख़ुद को ख़्वाहिशात के अक्सर दिखाए रंग

अख़तर बस्तवी

ज़बान बंद रही दिल का मुद्दआ' न कहा

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

ये मोहब्बत की जवानी का समाँ है कि नहीं

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

ये दिल कहता है कोई आ रहा है

अख़्तर अमान

तवील-तर है सफ़र मुख़्तसर नहीं होता

अख़्तर अमान

मैं परेशाँ हूँ मिलें चंद निवाले कैसे

अख़लाक़ बन्दवी

इधर चराग़ जल गए उधर चराग़ जल गए

अख़लाक़ बन्दवी

रू-ब-रू-ए-मर्ग

अख़लाक़ अहमद आहन

हर सम्त से तूफ़ान की आमद की हैं ख़बरें

अख़लाक़ आतिफ़

लफ़्ज़ों के सितम लहजों के आज़ार बहुत हैं

अख़लाक़ आतिफ़

न धूप धूप रहे और न साया साया तो

अखिलेश तिवारी

छोड़ के माल-ओ-दौलत सारी दुनिया में अपनी

अकबर हैदराबादी

सितम-ज़दा कई बशर क़दम क़दम पे थे

अकबर हैदराबादी

सायों से भी डर जाते हैं कैसे कैसे लोग

अकबर हैदराबादी

जवानी की दुआ लड़कों को ना-हक़ लोग देते हैं

अकबर इलाहाबादी

बूढ़ों के साथ लोग कहाँ तक वफ़ा करें

अकबर इलाहाबादी

उन्हें निगाह है अपने जमाल ही की तरफ़

अकबर इलाहाबादी

जब यास हुई तो आहों ने सीने से निकलना छोड़ दिया

अकबर इलाहाबादी

दश्त-ए-ग़ुर्बत है अलालत भी है तन्हाई भी

अकबर इलाहाबादी

गुज़र गई है अभी साअत-ए-गुज़िश्ता भी

अजमल सिराज

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.