मौजूद Poetry (page 3)

मंज़र को किसी तरह बदलने की दुआ दे

शीन काफ़ निज़ाम

आटा

शौकत थानवी

ज़िंदगी और मौत का यूँ राब्ता रह जाएगा

शकील सरोश

ख़बर नहीं कि ख़ला किस जगह पे हो मौजूद

शहज़ाद अहमद

हज़ार चेहरे हैं मौजूद आदमी ग़ाएब

शहज़ाद अहमद

घबरा के आसमाँ की तरफ़ देखती थी ख़ल्क़

शहज़ाद अहमद

सोता जागता साया

शहज़ाद अहमद

तुझ पे जाँ देने को तय्यार कोई तो होगा

शहज़ाद अहमद

सूरज की किरन देख के बेज़ार हुए हो

शहज़ाद अहमद

प्यार के रंग-महल बरसों में तय्यार हुए

शहज़ाद अहमद

जिस ने तिरी आँखों में शरारत नहीं देखी

शहज़ाद अहमद

जब आफ़्ताब न निकला तो रौशनी के लिए

शहज़ाद अहमद

दरिया कभी इक हाल में बहता न रहेगा

शहज़ाद अहमद

चुप के आलम में वो तस्वीर सी सूरत उस की

शहज़ाद अहमद

चराग़ ख़ुद ही बुझाया बुझा के छोड़ दिया

शहज़ाद अहमद

मुनकिर-ए-हक़

शहराम सर्मदी

ऐसा हो कि ना-मौऊद हो

शहराम सर्मदी

रह-ए-वफ़ा में रहे ये निशान-ए-ख़ातिर बस

शहराम सर्मदी

रौशन आईनों में झूटे अक्स उतार गया

शहनवाज़ ज़ैदी

नज़्म

शबनम अशाई

मैं

शबनम अशाई

हर एक लम्हा-ए-मौजूद इंतिज़ार में था

सऊद उस्मानी

हम तो मौजूद थे रातों में उजालों की तरह

सरवर अरमान

मैं किताब-ए-ख़ाक खोलूँ तो खुले

सरवत हुसैन

पत्थरों में आइना मौजूद है

सरवत हुसैन

पहनाए-बर-ओ-बहर के महशर से निकल कर

सरवत हुसैन

तो देखें और किसी को जो वो नहीं मौजूद

सरफ़राज़ ख़ालिद

कुछ तो ठहरे हुए दरिया में रवानी करें हम

सालिम सलीम

कोई सच्चे ख़्वाब दिखाता है पर जाने कौन दिखाता है

सलीम कौसर

अभी मौजूद थी लेकिन अभी गुम हो गई है

सलीम फ़राज़

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