नज़र Poetry (page 43)

अजब ख़जालत-ए-जाँ है नज़र तक आई हुई

सऊद उस्मानी

साक़ी की हर निगाह में सहबा थी जाम था

सत्यपाल जाँबाज़

इन्ना लिल्लाही ओ इन्ना इलैहि राजेऊन

सत्यपाल आनंद

अगला सफ़र तवील नहीं

सत्यपाल आनंद

कहाँ कहाँ से निगह उस को ढूँड लाए है

सत्य नन्द जावा

यूँ एहतिमाम-ए-रद्द-ए-सहर कर दिया गया

सत्तार सय्यद

वही है दश्त-ए-सफ़र रहगुज़र से आगे भी

सत्तार सय्यद

साए का इज़्तिराब

सरवत ज़ेहरा

सवाब की दुआओं ने गुनाह कर दिया मुझे

सरवत ज़ेहरा

ज़िंदगी के सब उभरते और ढलते ज़ाविए

सरवत मुख़तार

ज़ौक़-ए-सुख़न को अब तो तेरे आग लगाना अच्छा है

सरवर नेपाली

रौशनी से तीरगी ताबीर कर दी जाएगी

सरवर अरमान

इतने बहुत से रंग

सरवत हुसैन

देखा जो उस तरफ़ तो बदन पर नज़र गई

सरवत हुसैन

दश्त ले जाए कि घर ले जाए

सरवत हुसैन

आँखों में सौग़ात समेटे अपने घर आते हैं

सरवत हुसैन

दश्त में है एक नक़्श-ए-रहगुज़र सब से अलग

सरमद सहबाई

नज़र की धूप में आने से पहले

सरफ़राज़ ज़ाहिद

नज़र आते थे हम इक दूसरे को

सरफ़राज़ ज़ाहिद

माल-ओ-मता-ए-कूचा-ओ-बाज़ार बिक गए

सरफ़राज़ सय्यद

सेंट की कजले की और ग़ाज़े की गुल-कारी के ब'अद

सरफ़राज़ शाहिद

लबों में आ के क़ुल्फ़ी हो गए अशआर सर्दी में

सरफ़राज़ शाहिद

जिसे तू ने समझा है ज़िंदगी उसी इंक़लाब का नाम है

सरीर काबिरी

मैं फ़र्त-ए-मसर्रत से डर है कि न मर जाऊँ

सरदार सोज़

दिन-ब-दिन सफ़्हा-ए-हस्ती से मिटा जाता हूँ

सरदार सलीम

उन बुतों से रब्त तोड़ा चाहिए

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

काली काली घटा बरसती है

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

हम-सफ़र होता कोई तो बाँट लेते दूरियाँ

सरदार अंजुम

जीना मरना दोनों मुहाल

सरस्वती सरन कैफ़

किस नज़र से आप ने देखा दिल-ए-मजरूह को

साक़िब लखनवी

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