नज़र Poetry (page 44)

यूँ अकेला दश्त-ए-ग़ुर्बत में दिल-ए-नाकाम था

साक़िब लखनवी

मिलता जो कोई टुकड़ा इस चर्ख़-ए-ज़बरजद में

साक़िब लखनवी

इबरत-ए-दहर हो गया जब से छुपा मज़ार में

साक़िब लखनवी

हिज्र की शब नाला-ए-दिल वो सदा देने लगे

साक़िब लखनवी

उस के वारिस नज़र नहीं आए

साक़ी फ़ारुक़ी

डूब जाने का सलीक़ा नहीं आया वर्ना

साक़ी फ़ारुक़ी

अभी नज़र में ठहर ध्यान से उतर के न जा

साक़ी फ़ारुक़ी

ज़िंदा पानी सच्चा

साक़ी फ़ारुक़ी

शेर-इमदाद-अली का मेडक

साक़ी फ़ारुक़ी

सदमा

साक़ी फ़ारुक़ी

मस्ताना हीजड़ा

साक़ी फ़ारुक़ी

ख़ाली बोरे में ज़ख़्मी बिल्ला

साक़ी फ़ारुक़ी

डस्टबिन

साक़ी फ़ारुक़ी

ज़िंदा रहने के तज़्किरे हैं बहुत

साक़ी फ़ारुक़ी

ये कौन आया शबिस्ताँ के ख़्वाब पहने हुए

साक़ी फ़ारुक़ी

रात नादीदा बलाओं के असर में हम थे

साक़ी फ़ारुक़ी

हिरास फैल गया है ज़मीन-दानों में

साक़ी फ़ारुक़ी

एक दिन ज़ेहन में आसेब फिरेगा ऐसा

साक़ी फ़ारुक़ी

अभी नज़र में ठहर ध्यान से उतर के न जा

साक़ी फ़ारुक़ी

सामने जब कोई भरपूर जवानी आए

साक़ी अमरोहवी

कब इस से क़ब्ल नज़र में गुल-ए-मलाल खिला

समीना राजा

चश्म-ए-हैराँ को यूँ ही महव-ए-नज़र छोड़ गए

समद अंसारी

बुझते सूरज के शरारे नूर बरसाने लगे

समद अंसारी

आईना-दिल दाग़-ए-तमन्ना के लिए था

समद अंसारी

वो पल

सलमान अंसारी

मय-कशी छोड़ दी तौहीन-ए-हुनर कर आया

सलमान अंसारी

दिल को उजड़े हुए बीते हैं ज़माने कितने

सलमान अंसारी

क्या दिखाता है ये सफ़र देखो

सलमान अख़्तर

कैसे हो क्या है हाल मत पूछो

सलमान अख़्तर

दाइम सराब इक मिरे अंदर है क्या करूँ

सलमान अख़्तर

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