उम्र Poetry (page 57)

16 दिसम्बर आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमला

अली इमरान

नींद आती है मगर जाग रहा हूँ सर-ए-ख़्वाब

अली इफ़्तिख़ार ज़ाफ़री

रंग-ए-महफ़िल से फ़ुज़ूँ-तर मिरी हैरानी है

अली इफ़्तिख़ार ज़ाफ़री

हवा के तख़्त पर अगर तमाम उम्र तू रहा

अली अकबर नातिक़

ग़ुबार-ए-नूर है या कहकशाँ है या कुछ और

अली अकबर अब्बास

काटी है ग़म की रात बड़े एहतिराम से

अली अहमद जलीली

फ़रेब-ए-निकहत-ओ-गुलज़ार से बचाओ मुझे

अली अहमद जलीली

वरक़ है मेरे सहीफ़े का आसमाँ क्या है

अली अब्बास उम्मीद

अजब सी कशमकश तमाम उम्र साथ साथ थी

अलीना इतरत

बगूला बन के नाचता हुआ ये तन गुज़र गया

अलीना इतरत

मैं उन को कभी हद से गुज़रने नहीं दूँगा

अलीम उस्मानी

बादा-ख़ाने की रिवायत को निभाना चाहिए

अलीम उस्मानी

तमाम उम्र की दीवानगी के ब'अद खुला

आलमताब तिश्ना

उठते हुए तूफ़ान का मंज़र नहीं देखा

आलमताब तिश्ना

हिसार-ए-मक़्तल-ए-जाँ में लहू लहू मैं था

आलमताब तिश्ना

थपक थपक के जिन्हें हम सुलाते रहते हैं

आलम ख़ुर्शीद

हम को लुत्फ़ आता है अब फ़रेब खाने में

आलम ख़ुर्शीद

कोई सुनता ही नहीं किस को सुनाने लग जाएँ

अकरम नक़्क़ाश

सितारा आँख में दिल में गुलाब क्या रखना

अकरम महमूद

अब दिल भी दुखाओ तो अज़िय्यत नहीं होती

अकरम महमूद

शीशा का आदमी

अख़्तर-उल-ईमान

एक लड़का

अख़्तर-उल-ईमान

एक एहसास

अख़्तर-उल-ईमान

बाज़-आमद --- एक मुन्ताज

अख़्तर-उल-ईमान

आख़िरी मुलाक़ात

अख़्तर-उल-ईमान

इरफ़ान-ओ-आगही के सज़ा-वार हम हुए

अख़्तर ज़ियाई

नए सुर की तमसील

अख़्तर उस्मान

तू ने एक उम्र के बाद पूछा है हाल-ए-दिल

अख्तर शुमार

तिरे बग़ैर मसाफ़त का ग़म कहाँ कम है

अख्तर शुमार

अभी दिल में गूँजती आहटें मिरे साथ हैं

अख्तर शुमार

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