पास Poetry (page 38)

कल तो तिरे ख़्वाबों ने मुझ पर यूँ अर्ज़ानी की

अंजुम सलीमी

ज़िंदगी अपनी क़रीने से बसर होती नहीं

अंजुम नियाज़ी

अज़ाँ पे क़ैद नहीं बंदिश-ए-नमाज़ नहीं

अंजुम ख़याली

बदल चुके हैं सब अगली रिवायतों के निसाब

अंजुम ख़लीक़

वो जिस के नाम में लज़्ज़त बहुत है

अंजुम बाराबंकवी

शीशा ही चाहिए न मय-ए-अर्ग़वाँ मुझे

अनीस अहमद अनीस

मिरी बात का जो यक़ीं नहीं मुझे आज़मा के भी देख ले

आनंद नारायण मुल्ला

दुनिया है ये किसी का न इस में क़ुसूर था

आनंद नारायण मुल्ला

पर्दे में लाख फिर भी नुमूदार कौन है

अमजद इस्लाम अमजद

खेल उस ने दिखा के जादू के

अमजद इस्लाम अमजद

जगमगा उट्ठा है रंग मंच

अमित गुप्ता

गर यही है पास-ए-आदाब-ए-सुकूत

अमीरुल्लाह तस्लीम

वस्ल की शब भी अदा-ए-रस्म-ए-हिरमाँ में रहा

अमीरुल्लाह तस्लीम

पारसाई उन की जब याद आएगी

अमीरुल्लाह तस्लीम

उस के वादों से इतना तो साबित हुआ उस को थोड़ा सा पास-ए-तअल्लुक़ तो है

आमिर उस्मानी

दर्द बढ़ता गया जितने दरमाँ किए प्यास बढ़ती गई जितने आँसू पिए

आमिर उस्मानी

न तो बे-करानी-ए-दिल रही न तो मद्द-ओ-जज़्र-ए-तलब रहा

अमीर हम्ज़ा साक़िब

यकुम जनवरी है नया साल है

अमीर क़ज़लबाश

वो सर-फिरी हवा थी सँभलना पड़ा मुझे

अमीर क़ज़लबाश

हर रहगुज़र में काहकशाँ छोड़ जाऊँगा

अमीर क़ज़लबाश

आज की रात भी गुज़री है मिरी कल की तरह

अमीर क़ज़लबाश

जब से बाँधा है तसव्वुर उस रुख़-ए-पुर-नूर का

अमीर मीनाई

ख़त का इंतिज़ार

अमीर औरंगाबादी

अंधेरे में सोचने की मश्क़

अमीक़ हनफ़ी

मिरे बदन से कभी आँच इस तरह आए

अमीन राहत चुग़ताई

ग़म-ए-उल्फ़त में डूबे थे उभरना भी ज़रूरी था

अम्बर जोशी

रस्ता रोकती ख़ामोशी ने कौन सी बात सुनानी है

अम्बरीन सलाहुद्दीन

ख़ुशी का लम्हा रेत था सो हाथ से निकल गया

अंबरीन हसीब अंबर

वो लम्हा मुझ को शश्दर कर गया था

अम्बर बहराईची

जगमगाती रौशनी के पार क्या था देखते

अम्बर बहराईची

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