पत्थर Poetry (page 6)

लम्हा-दर-लम्हा गुज़रता ही चला जाता है

तनवीर अहमद अल्वी

ख़्वाब तो ख़्वाब है ता'बीर बदल जाती है

तनवीर अहमद अल्वी

अजीब शख़्स है पत्थर से पर बनाता है

तनवीर अहमद अल्वी

जलना हो तो मुझ से जल

तन्हा तिम्मापुरी

बात कुछ यूँ है कि ये ख़ौफ़ का मंज़र तो नहीं

तन्हा तिम्मापुरी

ज़ख़्म कब का था दर्द उठा है अब

ताजदार आदिल

चेहरा देखें तेरे होंट और पलकें देखें

तहज़ीब हाफ़ी

यादों की क़िंदील जलाना कितना अच्छा लगता है

ताबिश मेहदी

जहान-ए-दिल में सन्नाटा बहुत है

ताबिश मेहदी

हमारा डूबना मुश्किल नहीं था

ताबिश कमाल

बस्ती में कमी किस चीज़ की है पत्थर भी बहुत शीशे भी बहुत

ग़ुलाम रब्बानी ताबाँ

मैं किस लिए तुझे इल्ज़ाम-ए-बेवफ़ाई दूँ

ताब असलम

कोई भी नक़्श सलामत नहीं है चेहरे का

ताब असलम

जलूँगा मैं कि दिल उस बुत का ग़ैर पर आया

तअशशुक़ लखनवी

न डरे बर्क़ से दिल की है कड़ी मेरी आँख

तअशशुक़ लखनवी

ये फ़ना मेरी बक़ा हो जैसे

सय्यदा नफ़ीस बानो शम्अ

कलाम-ए-सख़्त कह कह कर वो क्या हम पर बरसते हैं

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

मैं कर्ब-ए-बुत-तराशी-ए-आज़र में क़ैद था

सय्यद शकील दस्नवी

कही बात उस ने भी ख़दशात की

सय्यद सग़ीर सफ़ी

न हो तू जिस में वो दिल भी है क्या दिल

सय्यद नज़ीर हसन सख़ा देहलवी

तिरे नज़दीक आता जा रहा हूँ

सय्यद मोहम्मद असकरी आरिफ़

ख़ाक-दाँ को हासिल-ए-ज़ौक़-ए-नज़र समझा था मैं

सय्यद मेराज जामी

एक इश्क़ की नस्ली तारीख़

सय्यद काशिफ़ रज़ा

सग-ए-जमाल हूँ गर्दन से बाँध कर ले जा

सय्यद काशिफ़ रज़ा

मसर्रत में भी है पिन्हाँ अलम यूँ भी है और यूँ भी

सय्यद हामिद

रऊनतों में न इतनी भी इंतिहा हो जाए

सय्यद अारिफ़

जागते में रात मुझ को ख़्वाब दिखलाया गया

सय्यद अहमद शमीम

उस के होंटों पर सुर महका करते हैं

स्वप्निल तिवारी

नींद से आ कर बैठा है

स्वप्निल तिवारी

धूप के भीतर छुप कर निकली

स्वप्निल तिवारी

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