कदम Poetry (page 32)

कभी कभी जो वो ग़ुर्बत-कदे में आए हैं

एहसान दानिश

जीने के लिए जो मर रहे हैं

एहसान दानिश

जो अना की सिफ़त है ज़ाती है

डॉक्टर आज़म

साबिक़ वज़ीर

दिलावर फ़िगार

शाइ'र से शेर सुनिए तो मिस्रा उठाइए

दिलावर फ़िगार

मुमकिन है कि मिलते कोई दम दोनों किनारे

दिलावर अली आज़र

मायूस-ए-अज़ल हूँ ये माना नाकाम-ए-तमन्ना रहना है

दिल शाहजहाँपुरी

क्या कहिए दास्तान-ए-तमन्ना बदल गई

दिल शाहजहाँपुरी

किसी क़लम से किसी की ज़बाँ से चलता हूँ

धीरेंद्र सिंह फ़य्याज़

कुछ यूँ सफ़र के शौक़ ने मंज़र दिखाए हैं

देवमणि पांडेय

मिरी बे-क़रारी मिरी आह-ओ-ज़ारी ये वहशत नहीं है तो फिर और क्या है

द्वारका दास शोला

रूह-ए-आवारा

दाऊद ग़ाज़ी

यक क़दम राह-ए-दोस्त है 'दाऊद'

दाऊद औरंगाबादी

हुस्न इस शम्अ-रू का है गुल-रंग

दाऊद औरंगाबादी

फ़िदा अल्लाह की ख़िल्क़त पे जिस का जिस्म ओ जाँ होगा

दत्तात्रिया कैफ़ी

तुम्हारी आँखें

दर्शिका वसानी

तमाम नूर-ए-तजल्ली तमाम रंग-ए-चमन

दर्शन सिंह

रक़्स करती है फ़ज़ा वज्द में जाम आया है

दर्शन सिंह

हम तुझ से किस हवस की फ़लक जुस्तुजू करें

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

अर्ज़-ओ-समा कहाँ तिरी वुसअ'त को पा सके

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

कहानी एक रात की

दानिश फ़राज़ी

क्या ख़बर थी मुन्हरिफ़ अहल-ए-जहाँ हो जाएँगे

दानिश अलीगढ़ी

एक दिन नक़्श-ए-क़दम पर मिरे बन जाएगी राह

दामोदर ठाकुर ज़की

उन के मिलने का ब-ज़ाहिर तो यक़ीं कोई नहीं

दामोदर ठाकुर ज़की

तमाशा-ए-दैर-ओ-हरम देखते हैं

दाग़ देहलवी

साज़ ये कीना-साज़ क्या जानें

दाग़ देहलवी

इस क़दर नाज़ है क्यूँ आप को यकताई का

दाग़ देहलवी

हाथ निकले अपने दोनों काम के

दाग़ देहलवी

अभी हमारी मोहब्बत किसी को क्या मालूम

दाग़ देहलवी

ये हादसा मिरी आँखों से गर नहीं होता

चित्रांश खरे

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