रास्ता Poetry (page 33)

सच कह 'रज़ा' ये किस से लगाई है साट-बाट

रज़ा अज़ीमाबादी

नाज़ का मारा हुआ हूँ मैं अदा की सौगंद

रज़ा अज़ीमाबादी

मैं ही नहीं हूँ बरहम उस ज़ुल्फ़-ए-कज-अदा से

रज़ा अज़ीमाबादी

इश्क़ की बीमारी है जिन को दिल ही दिल में गलते हैं

रज़ा अज़ीमाबादी

हर नफ़स मूरिद-ए-सफ़र हैं हम

रज़ा अज़ीमाबादी

जो राह अहल-ए-ख़िरद के लिए है ला-महदूद

रविश सिद्दीक़ी

उम्र-ए-अबद से ख़िज़्र को बे-ज़ार देख कर

रविश सिद्दीक़ी

नक़ाब-ए-शब में छुप कर किस की याद आई समझते हैं

रविश सिद्दीक़ी

ख़ल्वती-ए-ख़याल को होश में कोई लाए क्यूँ

रविश सिद्दीक़ी

रब्त हो ग़ैर से अगर कुछ है

रौनक़ टोंकवी

हमारी जीत यही थी कि ख़ुद से हार आए

रौनक़ रज़ा

तुम भी इस सूखते तालाब का चेहरा देखो

रउफ़ रज़ा

कितनी सदियों से लम्हों का लोबान जलता रहा

रउफ़ ख़लिश

हम अगर रद्द-ए-अमल अपना दिखाने लग जाएँ

रऊफ़ ख़ैर

ये कौन सा मक़ाम है ऐ जोश-ए-बे-ख़ुदी

रतन पंडोरवी

पहुँचे न जो मुराद को वो मुद्दआ हूँ मैं

रतन पंडोरवी

जोश पर रंग-ए-तरब देख के मयख़ाने का

रसूल जहाँ बेगम मख़फ़ी बदायूनी

कितनी ठंडी थी हवा क़र्या-ए-बर्फ़ानी की

रासिख़ इरफ़ानी

गर्म हर लम्हा लहू जिस्म के अंदर रखना

रासिख़ इरफ़ानी

क्या करेगा जा के बैतुल्लाह तू

रासिख़ अज़ीमाबादी

दिल ज़ुल्फ़-ए-बुताँ में है गिरफ़्तार हमारा

रासिख़ अज़ीमाबादी

शुऊर-ए-ज़ीस्त सही ए'तिबार करना भी

रशक खलीली

न जाने कब बसर हुए न जाने कब गुज़र गए

रशक खलीली

कभी यूँ भी करो शहर-ए-गुमाँ तक ले चलो मुझ को

राशिद तराज़

साक़ी-ए-रंगीं-अदा था बादा-ए-गुलफ़ाम था

रशीद शाहजहाँपुरी

साक़ी-ए-रंगीं-अदा था बादा-ए-गुलफ़ाम था

रशीद शाहजहाँपुरी

जिस को देखो एहतिसाब-ए-ज़ीस्त से ग़ाफ़िल है आज

रशीद शाहजहाँपुरी

ब-क़द्र-ए-हसरत-ए-दिल ज़ुल्म भी ढाना नहीं आता

रशीद शाहजहाँपुरी

ब-क़द्र-ए-हसरत-ए-दिल ज़ुल्म भी ढाना नहीं आता

रशीद शाहजहाँपुरी

आशियाने की बात करते हो

रशीद शाहजहाँपुरी

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