रास्ता Poetry (page 35)

परिंदे होते अगर हम हमारे पर होते

रऊफ़ अमीर

रोता हमें जो देखा दिल उस का पिघल गया

रंजूर अज़ीमाबादी

तुझ को आती है दिलासे की नहीं बात कोई

रंगीन सआदत यार ख़ाँ

तुम्हारी राह में आँखें बिछाए बैठा हूँ

राणा गन्नौरी

साथ रोने न सही गीत सुनाने आते

रम्ज़ी असीम

है समुंदर सामने प्यासे भी हैं पानी भी है

रम्ज़ अज़ीमाबादी

ऐब जो मुझ में हैं मेरे हैं हुनर तेरा है

रम्ज़ अज़ीमाबादी

जब उन के पा-ए-नाज़ की ठोकर में आएगा

रम्ज़ आफ़ाक़ी

ज़रा ज़रा सी बात पर वो मुझ से बद-गुमाँ रहे

रमेश कँवल

रूह में घोर अंधेरे को उतरने न दिया

राम रियाज़

हम तो दिन-रात इसी सोच में मर जाएँगे

राम नाथ असीर

फिर कोई ख़लिश नज़्द-ए-राग-ए-जाँ तो नहीं है

राम कृष्ण मुज़्तर

रह-ए-क़रार अजब राह-ए-बे-क़रारी है

राम अवतार गुप्ता मुज़्तर

सीने में जब दर्द कोई बो जाता है

राम अवतार गुप्ता मुज़्तर

दिए जला के हवाओं के मुँह पे मार आया

रख़शां हाशमी

दिल की धड़कन उलझ रही है ये कैसी सौग़ात ग़ज़ल की

रख़शां हाशमी

शामिल हूँ क़ाफ़िले में मगर सर में धुँद है

राजेन्द्र मनचंदा बानी

बैन करती हुई सम्तों से न डरना 'बानी'

राजेन्द्र मनचंदा बानी

मामूल

राजेन्द्र मनचंदा बानी

सियाह-ख़ाना-ए-उम्मीद-ए-राएगाँ से निकल

राजेन्द्र मनचंदा बानी

सरसब्ज़ मौसमों का नशा भी मिरे लिए

राजेन्द्र मनचंदा बानी

सदा-ए-दिल इबादत की तरह थी

राजेन्द्र मनचंदा बानी

क़दम ज़मीं पे न थे राह हम बदलते क्या

राजेन्द्र मनचंदा बानी

न हरीफ़ाना मिरे सामने आ मैं क्या हूँ

राजेन्द्र मनचंदा बानी

मिरे बदन में पिघलता हुआ सा कुछ तो है

राजेन्द्र मनचंदा बानी

गुज़र रहा हूँ सियह अंधे फ़ासलों से मैं

राजेन्द्र मनचंदा बानी

इक गुल-ए-तर भी शरर से निकला

राजेन्द्र मनचंदा बानी

चली डगर पर कभी न चलने वाला मैं

राजेन्द्र मनचंदा बानी

आसमाँ का सर्द सन्नाटा पिघलता जाएगा

राजेन्द्र मनचंदा बानी

यूँ हसरतों के दाग़ मोहब्बत में धो लिए

राजेन्द्र कृष्ण

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