रास्ता Poetry (page 64)

रौनक़ तिरे कूचे की बढ़ाने चले आए

असग़र राही

बस्ती मिली मकान मिले बाम-ओ-दर मिले

असग़र मेहदी होश

इक उम्र मह-ओ-साल की ठोकर में रहा हूँ

असग़र गोरखपुरी

न ये शीशा न ये साग़र न ये पैमाना बने

असग़र गोंडवी

मता-ए-ज़ीस्त क्या हम ज़ीस्त का हासिल समझते हैं

असग़र गोंडवी

मजाज़ कैसा कहाँ हक़ीक़त अभी तुझे कुछ ख़बर नहीं है

असग़र गोंडवी

इश्वों की है न उस निगह-ए-फ़ित्ना-ज़ा की है

असग़र गोंडवी

हाए रे प्यारी प्यारी आँख

असर लखनवी

बहार है तिरे आरिज़ से लौ लगाए हुए

असर लखनवी

ज़िंदगी इक नई राह पर

असर अकबराबादी

ग़म-ए-हयात से जब वास्ता पड़ा होगा

असद भोपाली

दो-जहाँ से मावरा हो जाएगा

असद भोपाली

उस अब्र से भी क़बाहत ज़ियादा होती है

असअ'द बदायुनी

रास्ता कोई सफ़र कोई मसाफ़त कोई

असअ'द बदायुनी

जो अक्स-ए-यार तह-ए-आब देख सकते हैं

असअ'द बदायुनी

गाँव की आँख से बस्ती की नज़र से देखा

असअ'द बदायुनी

जितना था सरगर्म-ए-कार उतना ही दिल नाकाम था

आरज़ू लखनवी

जहाँ कि है जुर्म एक निगाह करना

आरज़ू लखनवी

ऐ जज़्ब-ए-मोहब्बत तू ही बता क्यूँकर न असर ले दिल ही तो है

आरज़ू लखनवी

तमाम हुस्न-ए-जहाँ का जवाब हो के रहा

अर्शी भोपाली

शौक़-ए-आवारा दश्त-ओ-दर से है

अर्शी भोपाली

नशीली छाँव में बीते हुए ज़मानों को

अर्शी भोपाली

हो इंतिज़ार किसी का मगर मिरी नज़रें

अरशद सिद्दीक़ी

फ़ज़ाएँ कैफ़-ए-बहाराँ से जब महकती हैं

अरशद सिद्दीक़ी

मोहब्बत सिर्फ़ इक जज़्बा नहीं है

अरशद लतीफ़

फिर चंद दिनों से वो हर शब ख़्वाबों में हमारे आते हैं

अरशद काकवी

नित-नए नक़्श से बातिन को सजाता हुआ मैं

अरशद जमाल 'सारिम'

यार के नर्गिस-ए-बीमार का बीमार रहा

अरशद अली ख़ान क़लक़

वा'दा-ख़िलाफ़ कितने हैं ऐ रश्क-ए-माह आप

अरशद अली ख़ान क़लक़

लुत्फ़-ए-बहार मुश्फ़िक़-ए-मन देखते चलो

अरशद अली ख़ान क़लक़

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