रात Poetry (page 86)

हवस बला की मोहब्बत हमें बला की है

अनवर शऊर

इज़ाफ़ी ज़रूरतों के लिए एक नज़्म

अनवर सेन रॉय

पँख हिला कर शाम गई है इस आँगन से

अनवर सदीद

तलाश जिस को मैं करता फिरा ख़राबों में

अनवर सदीद

सियाहियों का नगर रौशनी से अट जाए

अनवर सदीद

दुश्मन तो मेरे तन से लहू चूसता रहा

अनवर सदीद

अपने दिल की आदत है शहज़ादों वाली

अनवर सदीद

मैं नज़र से पी रहा हूँ ये समाँ बदल न जाए

अनवर मिर्ज़ापुरी

अभी रात कुछ है बाक़ी न उठा नक़ाब साक़ी

अनवर मिर्ज़ापुरी

मैं नज़र से पी रहा हूँ ये समाँ बदल न जाए

अनवर मिर्ज़ापुरी

हर दम दुआ-ए-आब-ओ-हवा माँगते रहे

अनवर मीनाई

आज मुझे कुछ लोग मिले हैं पागल से

अनवर मीनाई

पढ़ने भी न पाए थे कि वो मिट भी गई थी

अनवर मसूद

ग़ुस्सैला परिंदा एक दिन उसे खा जाएगा

अनवार फ़ितरत

अश्क बेताब व निगह बे-बाक व चश्म-ए-तर ख़राब

अनवर देहलवी

कब लज़्ज़तों ने ज़ेहन का पीछा नहीं किया

अनवर अंजुम

हुआ करे अगर उस को कोई गिला होगा

अनवर अंजुम

हुआ करे अगर उस को कोई गिला होगा

अनवर अंजुम

धूप हो गए साए जल गए शजर जैसे

अनवर अंजुम

आओ देखें अहल-ए-वफ़ा की होती है तौक़ीर कहाँ

अनवर मोअज़्ज़म

बस अंधेरे ने रंग बदला है

अंजुम सलीमी

पानी की आवाज़

अंजुम सलीमी

मैं तुम्हारे लिए ले के आया हूँ

अंजुम सलीमी

गिर्या

अंजुम सलीमी

रात तिरे ख़्वाबों ने मुझ पर यूँ अर्ज़ानी की

अंजुम सलीमी

कल तो तिरे ख़्वाबों ने मुझ पर यूँ अर्ज़ानी की

अंजुम सलीमी

काग़ज़ था मैं दिए पे मुझे रख दिया गया

अंजुम सलीमी

आएगी हम को रास न यक-रंगी-ए-ख़ला

अंजुम रूमानी

हम से भी गाहे गाहे मुलाक़ात चाहिए

अंजुम रूमानी

दिन हो कि रात कुंज-ए-क़फ़स हो कि सेहन-ए-बाग़

अंजुम रूमानी

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