रात Poetry (page 99)

तेरे हिस्से के भी सदमात उठा लेता हूँ

अहमद कामरान

ख़्वाब यूँ ही नहीं होते पूरे

अहमद कामरान

चराग़ ताक़-ए-तिलिस्मात में दिखाई दिया

अहमद कामरान

कँवारे आँसुओं से रात घाएल होती रहती है

अहमद कमाल परवाज़ी

हुस्न नजात-दहिन्दा है

अहमद जावेद

मुझ से बड़ा है मेरा हाल

अहमद जावेद

किसी का ध्यान मह-ए-नीम-माह में आया

अहमद जावेद

दिल-ए-बेताब के हमराह सफ़र में रहना

अहमद जावेद

वो रात आए कि सर तेरा ले के बाज़ू पर

अहमद हुसैन माइल

नींद से उठ कर वो कहना याद है

अहमद हुसैन माइल

क्या आई थीं हूरें तिरे घर रात को मेहमाँ

अहमद हुसैन माइल

शब-ए-माह में जो पलंग पर मिरे साथ सोए तो क्या हुए

अहमद हुसैन माइल

क्यूँ शौक़ बढ़ गया रमज़ाँ में सिंगार का

अहमद हुसैन माइल

कोई हसीन है मुख़्तार-ए-कार-ख़ाना-ए-इश्क़

अहमद हुसैन माइल

मकाशफ़ा

अहमद हमेश

मा-बा'द-उत-तबीआत

अहमद हमेश

लैंडस्केप

अहमद हमेश

अपने जैसे आशिक़ों के नाम

अहमद हमेश

अंदेशा-ए-जाँ

अहमद हमेश

आख़िरी मुकालिमा

अहमद हमेश

उधर की शय इधर कर दी गई है

अहमद हमेश

तुम साथ चले थे तो मिरे साथ चला दिन

अहमद हमेश

न घर है कोई न सामान कुछ रहा बाक़ी

अहमद हमेश

किस को मालूम है क्या होगा नज़र से पहले

अहमद हमेश

ये वफ़ाएँ सारी धोके फिर ये धोके भी कहाँ

अहमद हमदानी

नहीं मिलते वो अब तो क्या बात है

अहमद हमदानी

मुज़्तरिब हैं वक़्त के ज़र्रात सूरज से कहो

अहमद हमदानी

मुँह अँधेरे घर से निकले फिर थे हंगामे बहुत

अहमद हमदानी

कुछ उस को याद करूँ उस का इंतिज़ार करूँ

अहमद हमदानी

दिल तुझे पा के भी तन्हा होता

अहमद हमदानी

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