सबसे Poetry (page 55)

हाथ हमारे सब से ऊँचे हाथों ही से गिला भी है

रईस फ़रोग़

गलियों में आज़ार बहुत हैं घर में जी घबराता है

रईस फ़रोग़

देर तक मैं तुझे देखता भी रहा

रईस फ़रोग़

आँखें जिन को देख न पाएँ सपनों में बिखरा देना

रईस फ़रोग़

उर्दू का जनाज़ा है ज़रा धूम से निकले

रईस अमरोहवी

ये कर्बला है नज़्र-ए-बला हम हुए कि तुम

रईस अमरोहवी

वस्ल की रुत हो कि फ़ुर्क़त की फ़ज़ा मुझ से है

राहुल झा

साथ उल्फ़त के मिले थोड़ी सी रुस्वाई भी

राहुल झा

दिल छोड़ के हर राहगुज़र ढूँढ रहा हूँ

रहमत इलाही बर्क़ आज़मी

बहुत रौशन हम अपना नय्यर-ए-तक़दीर देखेंगे

रहमत इलाही बर्क़ आज़मी

मौज-ए-हवा की ज़ंजीरें पहनेंगे धूम मचाएँगे

राही मासूम रज़ा

हर इक फ़न में यक़ीनन ताक़ है वो

राही फ़िदाई

साक़ी भले फटकने न दे पास जाम के

राहील फ़ारूक़

इधर कुछ दिन से दिल की बेकली कम हो गई है

इरफ़ान सत्तार

हमें नहीं आते ये कर्तब नए ज़माने वाले

इरफ़ान सत्तार

अजब है रंग-ए-चमन जा-ब-जा उदासी है

इरफ़ान सत्तार

अब तिरे लम्स को याद करने का इक सिलसिला और दीवाना-पन रह गया

इरफ़ान सत्तार

ओस से भरा गिलास

इक़तिदार जावेद

दोस्तों में वाक़ई ये बहस भी अक्सर हुई

इक़बाल उमर

कुछ ऐसा है फ़रेब-ए-नर्गिस-ए-मस्ताना बरसों से

इक़बाल सुहैल

ज़बानों पर नहीं अब तूर का फ़साना बरसों से

इक़बाल सुहैल

पढ़ते पढ़ते थक गए सब लोग तहरीरें मिरी

इक़बाल साजिद

जैसे हर चेहरे की आँखें सर के पीछे आ लगीं

इक़बाल साजिद

मूँद कर आँखें तलाश-ए-बहर-ओ-बर करने लगे

इक़बाल साजिद

ख़ुदा ने जिस को चाहा उस ने बच्चे की तरह ज़िद की

इक़बाल साजिद

हर कसी को कब भला यूँ मुस्तरद करता हूँ मैं

इक़बाल साजिद

गड़े मर्दों ने अक्सर ज़िंदा लोगों की क़यादत की

इक़बाल साजिद

इक तबीअत थी सो वो भी ला-उबाली हो गई

इक़बाल साजिद

मिरे लबों का तबस्सुम तो सब ने देख लिया

इक़बाल सफ़ी पूरी

गुज़र गई जो चमन पर वो कोई क्या जाने

इक़बाल सफ़ी पूरी

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