सदा Poetry (page 13)

हस्ब-ए-फ़रमान-ए-अमीर-ए-क़ाफ़िला चलते रहे

सय्यद नसीर शाह

है मुद्दतों से ख़ाना-ए-ज़ंजीर बे-सदा

मोहम्मद रफ़ी सौदा

कब दिल शिकस्त-गाँ से कर अर्ज़-ए-हाल आया

मोहम्मद रफ़ी सौदा

बार-हा दिल को मैं समझा के कहा क्या क्या कुछ

मोहम्मद रफ़ी सौदा

शहर-ए-दिल सुलगा तो आहों का धुआँ छाने लगा

सत्य नन्द जावा

दश्त-ए-तन्हाई में हम ख़ाक उड़ा देते हैं

सत्य नन्द जावा

दर्द-ए-दिल के लिए कुछ ऐसी दवा ली हम ने

सत्य नन्द जावा

इक राज़-ए-दिलरुबा को बयाँ होना है अभी

सत्तार सय्यद

सदाओं का समुंदर

सरवत ज़ेहरा

बिंत-ए-हव्वा

सरवत ज़ेहरा

ऐ ख़्वाब-ए-दिल-नवाज़ न आ कर सता मुझे

सरवर नेपाली

वक़्त के हाथों हिकायात-ए-अना भूल गए

सरवर आलम राज़

उसी किनारा-ए-हैरत-सरा को जाता हूँ

सरवत हुसैन

पत्थरों में आइना मौजूद है

सरवत हुसैन

हमारे लिए सुब्ह के होंट पर बद-दुआ' है

सरमद सहबाई

नींद से जागी हुई आँखों को अंधा कर दिया

सरमद सहबाई

कौन है किस ने पुकारा है सदा कैसे हुई

सरमद सहबाई

बे-सदा सी किसी आवाज़ के पीछे पीछे

सरफ़राज़ नवाज़

लड़खड़ाता हूँ कभी ख़ुद ही सँभल जाता हूँ

सरफ़राज़ नवाज़

शायद मिट्टी मुझे फिर पुकारे

सारा शगुफ़्ता

हिज्र की शब नाला-ए-दिल वो सदा देने लगे

साक़िब लखनवी

हिज्र की शब नाला-ए-दिल वो सदा देने लगे

साक़िब लखनवी

हज़ार फूल लिए मौसम-ए-बहार आए

साक़िब लखनवी

ग़श भी आया मिरी पुर्सिश को क़ज़ा भी आई

साक़िब लखनवी

शेर-इमदाद-अली का मेडक

साक़ी फ़ारुक़ी

मुर्दा-ख़ाना

साक़ी फ़ारुक़ी

वो दुख जो सोए हुए हैं उन्हें जगा दूँगा

साक़ी फ़ारुक़ी

पाँव मारा था पहाड़ों पे तो पानी निकला

साक़ी फ़ारुक़ी

मुझ को मिरी शिकस्त की दोहरी सज़ा मिली

साक़ी फ़ारुक़ी

मिट्टी थी ख़फ़ा मौज उठा ले गई हम को

साक़ी फ़ारुक़ी

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