सागर Poetry (page 10)

कनार-ए-आब खड़ा ख़ुद से कह रहा है कोई

शकेब जलाली

इस बुत-कदे में तू जो हसीं-तर लगा मुझे

शकेब जलाली

बुझे बुझे से शरारे मुझे क़ुबूल नहीं

शकेब जलाली

ख़ूनीं गुलाब सब्ज़ सनोबर है सामने

शकेब अयाज़

आज लगता है समुंदर में है तुग़्यानी सी

शाइस्ता मुफ़्ती

शाम आ कर झरोकों में बैठी रहे

शाइस्ता मुफ़्ती

अजनबी शहर में उल्फ़त की नज़र को तरसे

शाइस्ता मुफ़्ती

बुलंदी की पैमाइश

शहज़ाद नय्यर

सोचिए गर उसे हर नफ़स मौत है कुछ मुदावा भी हो बे-हिसी के लिए

शहज़ाद अंजुम बुरहानी

कभी कभी छलक उठता है आब ओ रंग उन का

शहज़ाद अहमद

ये सोच कर कि तेरी जबीं पर न बल पड़े

शहज़ाद अहमद

कहीं भी साया नहीं किस तरफ़ चले कोई

शहज़ाद अहमद

जाने किस सम्त से हवा आई

शहज़ाद अहमद

अपनी तस्वीर को आँखों से लगाता क्या है

शहज़ाद अहमद

सभी को ग़म है समुंदर के ख़ुश्क होने का

शहरयार

साए

शहरयार

रात जुदाई की रात

शहरयार

नफ़ी से इसबात तक

शहरयार

जिस्म की कश्ती में आ

शहरयार

फ़ैसले की घड़ी

शहरयार

ये क़ाफ़िले यादों के कहीं खो गए होते

शहरयार

ये जब है कि इक ख़्वाब से रिश्ता है हमारा

शहरयार

सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का

शहरयार

सभी को ग़म है समुंदर के ख़ुश्क होने का

शहरयार

नशात-ए-ग़म भी मिला रंज-ए-शाद-मानी भी

शहरयार

दिल में उतरेगी तो पूछेगी जुनूँ कितना है

शहरयार

निशात-उस्सानिया

शहनाज़ नबी

शिकस्त-ए-शीशा-ए-दिल की दवा मैं क्या करता

शहनवाज़ ज़ैदी

जब आफ़्ताब से चेहरा छुपा रही थी हवा

शहनवाज़ ज़ैदी

ज़र-ए-सरिश्क फ़ज़ा में उछालता हुआ मैं

शाहिद ज़की

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