छाया Poetry (page 22)

मख़मली ख़्वाब का आँखों में न मंज़र फैला

अनवर मीनाई

हो रहा है टुकड़े टुकड़े दिल मेरे ग़म-ख़्वार का

अनवर देहलवी

उसे यादों में जब लाना मुसलसल कर दिया मैं ने

अनुभव गुप्ता

हम बे-वतन ख़्वाबों के जोलाहे हैं

अंजुम सलीमी

मिरी आवाज़ सुन कर ज़िंदगी बेदार हो जैसे

अंजुम नियाज़ी

किस ने दी मुझ को सदा कौन-ओ-मकाँ के उस तरफ़

अंजुम नियाज़ी

अँधेरी रात है साया तो हो नहीं सकता

अंजुम ख़याली

आज़ार मिरे दिल का दिल-आज़ार न हो जाए

अंजुम ख़याली

ए'तिराफ़

अंजुम ख़लीक़

अपनी जेब थी ख़ाली ख़ाली करते क्या

अंजुम अज़ीमाबादी

अनजाने ख़्वाब की ख़ातिर क्यूँ चैन गँवाया

अंजुम अंसारी

उस बुत को ज़रा छू के तो देखें कि वो क्या है

अनजुम अब्बासी

कीजिए हुनर का ज़िक्र क्या आबरू-ए-हुनर नहीं

अनीस देहलवी

हेलुसिनेशन

अम्मार इक़बाल

रौशनी कम है

अमजद नजमी

तज्दीद

अमजद इस्लाम अमजद

हम-ज़ाद

अमजद इस्लाम अमजद

ऐ वक़्त ज़रा थम जा

अमजद इस्लाम अमजद

यूँ तो क्या क्या नज़र नहीं आता

अमजद हैदराबादी

सुर्ख़ सितारा

आमिर उस्मानी

रक़ीब-ए-जाँ नज़र का नूर हो जाए तो क्या कीजे

अमीता परसुराम 'मीता'

उसे बेचैन कर जाऊँगा मैं भी

अमीर क़ज़लबाश

जब से बाँधा है तसव्वुर उस रुख़-ए-पुर-नूर का

अमीर मीनाई

ख़ुद को हर आरज़ू के उस पार कर लिया है

अमीर इमाम

छुप जाता है फिर सूरज जिस वक़्त निकलता है

अमीर इमाम

बन के साया ही सही सात तो होती होगी

अमीर इमाम

इस दौर से ख़ुलूस मोहब्बत वफ़ा न माँग

अमीर अहमद ख़ुसरव

ख़ाना-ए-ज़ंजीर का पाबंद रहता हूँ सदा

अमानत लखनवी

सबा की बात सुनें फूल से कलाम करें

अल्ताफ़ परवाज़

वो मसाफ़-ए-जीस्त में हर मोड़ पर तन्हा रहा

अलक़मा शिबली

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