रात Poetry (page 57)

उस की सूरत का तसव्वुर दिल में जब लाते हैं हम

ग़मगीन देहलवी

न पूछ हिज्र में जो हाल अब हमारा है

ग़मगीन देहलवी

मुखड़ा वो बुत जिधर करेगा

ग़मगीन देहलवी

जो न वहम-ओ-गुमान में आवे

ग़मगीन देहलवी

जहाँ ख़राब सही हम बदन-दरीदा सही

ग़ालिब अयाज़

पी जिस क़दर मिले शब-ए-महताब में शराब

ग़ालिब

कहूँ किस से मैं कि क्या है शब-ए-ग़म बुरी बला है

ग़ालिब

'ग़ालिब' छुटी शराब पर अब भी कभी कभी

ग़ालिब

दाग़-ए-फ़िराक़-ए-सोहबत-ए-शब की जली हुई

ग़ालिब

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे

ग़ालिब

ज़ुल्मत-कदे में मेरे शब-ए-ग़म का जोश है

ग़ालिब

ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता

ग़ालिब

वो फ़िराक़ और वो विसाल कहाँ

ग़ालिब

तस्कीं को हम न रोएँ जो ज़ौक़-ए-नज़र मिले

ग़ालिब

सियाही जैसे गिर जाए दम-ए-तहरीर काग़ज़ पर

ग़ालिब

सर-गश्तगी में आलम-ए-हस्ती से यास है

ग़ालिब

नहीं कि मुझ को क़यामत का ए'तिक़ाद नहीं

ग़ालिब

मिलती है ख़ू-ए-यार से नार इल्तिहाब में

ग़ालिब

लाज़िम था कि देखो मिरा रस्ता कोई दिन और

ग़ालिब

जहाँ तेरा नक़्श-ए-क़दम देखते हैं

ग़ालिब

हर क़दम दूरी-ए-मंज़िल है नुमायाँ मुझ से

ग़ालिब

ग़म नहीं होता है आज़ादों को बेश अज़-यक-नफ़स

ग़ालिब

गर न अंदोह-ए-शब-ए-फ़ुर्क़त बयाँ हो जाएगा

ग़ालिब

दर्द से मेरे है तुझ को बे-क़रारी हाए हाए

ग़ालिब

बिसात-ए-इज्ज़ में था एक दिल यक क़तरा ख़ूँ वो भी

ग़ालिब

बज़्म-ए-शाहंशाह में अशआर का दफ़्तर खुला

ग़ालिब

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे

ग़ालिब

बहुत सही ग़म-ए-गीती शराब कम क्या है

ग़ालिब

शाइरी बात नहीं गर्म-ए-सुख़न होने की

गौहर होशियारपुरी

समन-बरों से चमन दौलत-ए-नुमू माँगे

गौहर होशियारपुरी

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.