सितम Poetry (page 28)

कोई मेयार-ए-मोहब्बत न रहा मेरे बा'द

बासित भोपाली

इश्क़-ए-सितम-परस्त क्या हुस्न-ए-सितम-शिआ'र क्या

बासित भोपाली

वो सितम-परवर ब-चश्म अश्क-बार आ ही गया

बशीर फ़ारूक़

दिल जो उम्मीद-वार होता है

बशीरुद्दीन राज़

अज़ल-ता-अबद

बशर नवाज़

जब कभी होंगे तो हम माइल-ए-ग़म ही होंगे

बशर नवाज़

दिल जिंस-ए-मोहब्बत का ख़रीदार नहीं है

बाक़ी सिद्दीक़ी

यूँ सितमगर नहीं होते जानाँ

बाक़ी अहमदपुरी

उदास बाम है दर काटने को आता है

बाक़ी अहमदपुरी

सज़ा

बाक़र मेहदी

मैं भाग के जाऊँगा कहाँ अपने वतन से

बाक़र मेहदी

चाहा बहुत कि इश्क़ की फिर इब्तिदा न हो

बाक़र मेहदी

बदल के रख देंगे ये तसव्वुर कि आदमी का वक़ार क्या है

बाक़र मेहदी

अश्क मेरे हैं मगर दीदा-ए-नम है उस का

बाक़र मेहदी

अब ख़ानुमाँ-ख़राब की मंज़िल यहाँ नहीं

बाक़र मेहदी

देखते देखते सितम तेरा

बाक़र आगाह वेलोरी

महव-ए-फ़रियाद हो गया है दिल

बाक़र आगाह वेलोरी

उसी के ज़ुल्म से मैं हालत-ए-पनाह में था

बख़्श लाइलपूरी

क़ातिल हुआ ख़मोश तो तलवार बोल उठी

बख़्श लाइलपूरी

पड़े हैं राह में जो लोग बे-सबब कब से

बख़्श लाइलपूरी

जो पी रहा है सदा ख़ून बे-गुनाहों का

बख़्श लाइलपूरी

क्या पूछता है हम से तू ऐ शोख़ सितमगर

ज़फ़र

ये क़िस्सा वो नहीं तुम जिस को क़िस्सा-ख़्वाँ से सुनो

ज़फ़र

वाक़िफ़ हैं हम कि हज़रत-ए-ग़म ऐसे शख़्स हैं

ज़फ़र

शमशीर-ए-बरहना माँग ग़ज़ब बालों की महक फिर वैसी ही

ज़फ़र

रुख़ जो ज़ेर-ए-सुंबल-ए-पुर-पेच-ओ-ताब आ जाएगा

ज़फ़र

नहीं इश्क़ में इस का तो रंज हमें कि क़रार ओ शकेब ज़रा न रहा

ज़फ़र

न उस का भेद यारी से न अय्यारी से हाथ आया

ज़फ़र

जब कभी दरिया में होते साया-अफ़गन आप हैं

ज़फ़र

हम ये तो नहीं कहते कि ग़म कह नहीं सकते

ज़फ़र

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