तबीयत Poetry (page 12)

आया ही नहीं कोई बोझ अपना उठाने को

अहमद महफ़ूज़

दिल किसी बज़्म में जाते ही मचलता है 'ख़याल'

अहमद ख़याल

जैसी होनी हो वो रफ़्तार नहीं भी होती

अहमद ख़याल

जिस से ये तबीअत बड़ी मुश्किल से लगी थी

अहमद फ़राज़

ये तबीअत है तो ख़ुद आज़ार बन जाएँगे हम

अहमद फ़राज़

जिस से ये तबीअत बड़ी मुश्किल से लगी थी

अहमद फ़राज़

हर एक बात न क्यूँ ज़हर सी हमारी लगे

अहमद फ़राज़

जितनी हम चाहते थे उतनी मोहब्बत नहीं दी

अहमद अशफ़ाक़

उर्यां ही रहे लाश ग़रीब-उल-वतनी में

आग़ा शाएर क़ज़लबाश

उन्स अपने में कहीं पाया न बेगाने में था

आग़ा शाएर क़ज़लबाश

रोने से जो भड़ास थी दिल की निकल गई

आग़ा शाएर क़ज़लबाश

दिल सर्द हो गया है तबीअत बुझी हुई

आग़ा शाएर क़ज़लबाश

मैं जब भी छूने लगूँ तुम ज़रा परे हो जाओ

आफ़ताब इक़बाल शमीम

न हो या रब ऐसी तबीअत किसी की

अफ़सर इलाहाबादी

न हो या रब ऐसी तबीअत किसी की

अफ़सर इलाहाबादी

कहीं से बास नए मौसमों की लाती हुई

आबिद सयाल

कहीं से बास नए मौसमों की लाती हुई

आबिद सयाल

फ़रेब-ए-ज़ार मोहब्बत-नगर खुला हुआ है

अब्दुर्राहमान वासिफ़

शेर कहने की तबीअत न रही

अब्दुल सलाम

शेर कहने की तबीअत न रही

अब्दुल सलाम

अदब में मुद्दई-ए-फ़न तो बे-शुमार मिले

अब्दुल रहमान ख़ान वासिफ़ी बहराईची

फिर आज 'अदम' शाम से ग़मगीं है तबीअत

अब्दुल हमीद अदम

ज़ुल्फ़-ए-बरहम सँभाल कर चलिए

अब्दुल हमीद अदम

तौबा का तकल्लुफ़ कौन करे हालात की निय्यत ठीक नहीं

अब्दुल हमीद अदम

साक़ी शराब ला कि तबीअ'त उदास है

अब्दुल हमीद अदम

ख़ाली है अभी जाम मैं कुछ सोच रहा हूँ

अब्दुल हमीद अदम

भूली-बिसरी बातों से क्या तश्कील-ए-रूदाद करें

अब्दुल हमीद अदम

मैं बात कौन से पैरा-ए-बयाँ में करूँ

अब्दुल अज़ीज़ ख़ालिद

कुछ तो अपनी गर्दनें कज हैं हवा के ज़ोर से

अब्बास ताबिश

यूँ तो शीराज़ा-ए-जाँ कर के बहम उठते हैं

अब्बास ताबिश

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