तबीयत Poetry (page 5)

उम्र गुज़री मिरी शीरीनी-ए-गुफ़्तार के साथ

सैफ़ुद्दीन सैफ़

इसी दो-राहे पर

साहिर लुधियानवी

गुरेज़

साहिर लुधियानवी

जब कभी उन की तवज्जोह में कमी पाई गई

साहिर लुधियानवी

याद आता है मुझे रेत का घर बारिश में

साहिबा शहरयार

अब कहाँ ऐसी तबीअत वाले

साग़र सिद्दीक़ी

बात फूलों की सुना करते थे

साग़र सिद्दीक़ी

तौबा तौबा से नदामत की घड़ी आई है

साग़र ख़य्यामी

बहुत जी तरसता रहा रात भर

सफ़दर मीर

नहीं मा'लूम जीने का हुनर कैसा रखा है

सादिया सफ़दर सादी

और किस तरह उसे कोई क़बा दी जाए

सबा जायसी

जो देखिए तो करम इश्क़ पर ज़रा भी नहीं

सबा अकबराबादी

अब तो यूँ लब पे मिरे हर्फ़-ए-सदाक़त आए

रूही कंजाही

हवा-ए-जिंदगी भी कूचा-ए-क़ातिल से आती है

रोहित सोनी ‘ताबिश’

मेरे पहलू में हमेशा रही सूरत अच्छी

रियाज़ ख़ैराबादी

मुझ बला-नोश को तलछट भी है काफ़ी साक़ी

रिन्द लखनवी

दिल किस से लगाऊँ कहीं दिलबर नहीं मिलता

रिन्द लखनवी

आफ़त शब-ए-तन्हाई की टल जाए तो अच्छा

रिन्द लखनवी

किसी भी तौर तबीअ'त कहाँ सँभलने की

रियाज़ मजीद

कौन से जज़्बात ले कर तेरे पास आया करूँ

रियाज़ मजीद

आज़ार-ए-दिल से रंग-ए-तबीअ'त बदल गया

रऊफ़ यासीन जलाली

अपने होने का कोई साज़ नहीं देती है

राशिद तराज़

दिल हमारा जानिब-ए-ज़ुल्फ़-ए-सियह-फ़ाम आएगा

रशीद लखनवी

कौन सा इश्क़-ए-बुताँ में हमें सदमा न हुआ

रसा रामपुरी

जलने का हुनर सिर्फ़ फ़तीले के लिए था

रम्ज़ अज़ीमाबादी

दिल-ओ-नज़र में न पैदा हुई शकेबाई

राम कृष्ण मुज़्तर

दर्द सारे शब-ए-ख़ामोश में गिर जाते हैं

रजनीश सचन

बजाए हम-सफ़री इतना राब्ता है बहुत

राजेन्द्र मनचंदा बानी

किसी दिन ज़िंदगानी में करिश्मा क्यूँ नहीं होता

राजेश रेड्डी

ख़ुद को मुम्ताज़ बनाने की दिली-ख़्वाहिश में

राही फ़िदाई

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