तौबा Poetry (page 5)

ये और बात है हर शख़्स के गुमाँ में नहीं

हीरा लाल फ़लक देहलवी

बरसात के आते ही तौबा न रही बाक़ी

हसरत मोहानी

है मश्क़-ए-सुख़न जारी चक्की की मशक़्क़त भी

हसरत मोहानी

दीदनी हैं दिल-ए-ख़राब के रंग

हसरत मोहानी

ज़ुल्मत ही पहले थी जो हवाले में रह गई

हसन निज़ामी

शीशा उठा कर ताक़ से हम ने

हसन बरेलवी

मुझे अब मौत बेहतर ज़िंदगी से

हक़ीर

हमारी वो वफ़ादारी कि तौबा

हक़ीर

आज सौदा-ए-मोहब्बत की ये अर्ज़ानी है

हेंसन रेहानी

हमारी ही बदौलत आ गई है

हमीद गौहर

अंदर की दुनियाएँ मिला के एक नगर हो जाएँ

हैदर क़ुरैशी

मिरी शराब की तौबा पे जा न ऐ वाइज़

हफ़ीज़ जौनपुरी

पी हम ने बहुत शराब तौबा

हफ़ीज़ जौनपुरी

हसीनों से फ़क़त साहिब-सलामत दूर की अच्छी

हफ़ीज़ जौनपुरी

दिया जब जाम-ए-मय साक़ी ने भर के

हफ़ीज़ जौनपुरी

बैठ जाता हूँ जहाँ छाँव घनी होती है

हफ़ीज़ जौनपुरी

तौबा तौबा शैख़ जी तौबा का फिर किस को ख़याल

हफ़ीज़ जालंधरी

तौबा-नामा

हफ़ीज़ जालंधरी

निगाह-ए-आरज़ू-आमोज़ का चर्चा न हो जाए

हफ़ीज़ जालंधरी

मौत के चेहरे पे है क्यूँ मुर्दनी छाई हुई

हफ़ीज़ जालंधरी

इश्क़ के हाथों ये सारी आलम-आराई हुई

हफ़ीज़ जालंधरी

देख लो तुम ख़ू-ए-आतिश ऐ क़मर शीशे में है

हबीब मूसवी

जो मिरे दिल में आह हो के रही

हबीब अशअर देहलवी

नज़्ज़ारा-ए-रुख़-ए-साक़ी से मुझ को मस्ती है

गोया फ़क़ीर मोहम्मद

किसी से ख़्वाब का चर्चा न करना

गिरिजा व्यास

दोस्ती उस की दुश्मनी ही सही

ग़ुलाम मौला क़लक़

जल्वा-ए-हुस्न अगर ज़ीनत-ए-काशाना बने

ग़ुबार भट्टी

मैं और बज़्म-ए-मय से यूँ तिश्ना-काम आऊँ

ग़ालिब

की मिरे क़त्ल के बाद उस ने जफ़ा से तौबा

ग़ालिब

मैं और बज़्म-ए-मय से यूँ तिश्ना-काम आऊँ

ग़ालिब

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