तौबा Poetry (page 3)

न कुछ सितम से तिरे आह आह करता हूँ

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

एक तो तिरी दौलत था ही दिल ये सौदाई

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मौत आती नहीं क़रीने की

शैख़ अब्दुल लतीफ़ तपिश

मौत आती नहीं क़रीने की

शैख़ अब्दुल लतीफ़ तपिश

रदीफ़ क़ाफ़िया बंदिश ख़याल लफ़्ज़-गरी

शहज़ाद क़ैस

तेरी ज़ुल्फ़ें ग़ैर अगर सुलझाएगा

शाद अज़ीमाबादी

इक तमन्ना कि सहर से कहीं खो जाती है

शानुल हक़ हक़्क़ी

हाए 'सीमाब' उस की मजबूरी

सीमाब अकबराबादी

सुबू पर जाम पर शीशे पे पैमाने पे क्या गुज़री

सीमाब अकबराबादी

आख़िरश आराइशों की ज़िंदगी चुभने लगी

सौरभ शेखर

साक़ी हमारी तौबा तुझ पर है क्यूँ गवारा

मोहम्मद रफ़ी सौदा

मस्त-ए-सहर ओ तौबा-कुनाँ शाम का हूँ मैं

मोहम्मद रफ़ी सौदा

ज़मीं की वुसअ'तों से आसमाँ तक

सत्यपाल जाँबाज़

ज़ाहिद मिरी समझ में तो दोनों गुनाह हैं

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

की मय से हज़ार बार तौबा

सरदार गेंडा सिंह मशरिक़ी

आँखें दो जुडवाँ बहनें

सारा शगुफ़्ता

दिल को उजड़े हुए बीते हैं ज़माने कितने

सलमान अंसारी

मिट चुके जो भी थे तौबा-शिकनी के अस्बाब

सालिक लखनवी

खनक जाते हैं जब साग़र तो पहरों कान बजते हैं

सालिक लखनवी

बू-ए-गुल बाद-ए-सबा लाई बहुत देर के बा'द

सलाम संदेलवी

उन के रुख़्सार पे ढलके हुए आँसू तौबा

साहिर लुधियानवी

तुम न तौबा करो जफ़ाओं से

साहिर होशियारपुरी

आप से क्या दोस्ती होने लगी

साहिर होशियारपुरी

चमन में रह के भी क्यूँ दिल की वीरानी नहीं जाती

सहर महमूद

जाम टकराओ! वक़्त नाज़ुक है

साग़र सिद्दीक़ी

तौबा तौबा से नदामत की घड़ी आई है

साग़र ख़य्यामी

मुसव्विर अपने तसव्वुर का ढूँढता है दवाम

सईदुल ज़फर चुग़ताई

'रियाज़' तौबा न टूटे न मय-कदा छूटे

रियाज़ ख़ैराबादी

जाम है तौबा-शिकन तौबा मिरी जाम-शिकन

रियाज़ ख़ैराबादी

इतनी पी है कि ब'अद-ए-तौबा भी

रियाज़ ख़ैराबादी

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