तेग Poetry (page 6)

मिट्टी जब तक नम रहती है

रसा चुग़ताई

जैसे फ़साना ख़त्म हुआ

राज नारायण राज़

दिल की बर्बादी के आसार अभी बाक़ी हैं

राही शहाबी

जो हो सके तो कभी इतनी मेहरबानी कर

इक़बाल अासिफ़

करता है ऐ 'असर' दिल-ए-ख़ूँ-गश्ता का गिला

इम्दाद इमाम असर

सूली चढ़े जो यार के क़द पर फ़िदा न हो

इम्दाद इमाम असर

जब ख़ुदा को जहाँ बसाना था

इम्दाद इमाम असर

ख़ुर्शीद फ़िराक़ में तपाँ है

इमदाद अली बहर

कभी तो देखे हमारी अरक़-फ़िशानी धूप

इमदाद अली बहर

जाते है ख़ानक़ाह से वाइज़ सलाम है

इमदाद अली बहर

जब दस्त-बस्ता की नहीं उक़्दा-कुशा नमाज़

इमदाद अली बहर

इस तरह ज़ीस्त बसर की कोई पुरसाँ न हुआ

इमदाद अली बहर

हम नाक़िसों के दौर में कामिल हुए तो क्या

इमदाद अली बहर

बशर रोज़-ए-अज़ल से शेफ़्ता है शान-ओ-शौकत का

इमदाद अली बहर

दिल उन के साथ मगर तेग़ और शख़्स के साथ

इफ़्तिख़ार आरिफ़

ये मो'जिज़ा भी किसी की दुआ का लगता है

इफ़्तिख़ार आरिफ़

जुनूँ का रंग भी हो शोला-ए-नुमू का भी हो

इफ़्तिख़ार आरिफ़

हम अहल-ए-जब्र के नाम-ओ-नसब से वाक़िफ़ हैं

इफ़्तिख़ार आरिफ़

थी अजब ही दास्ताँ जब तमाम हो गई

हिलाल फ़रीद

तुम भी निगाह में हो अदू भी नज़र में है

हिज्र नाज़िम अली ख़ान

काफ़िर-ए-इश्क़ हूँ मुश्ताक़-ए-शहादत भी हूँ

हातिम अली मेहर

ज़िक्र-ए-जानाँ कर जो तुझ से हो सके

हातिम अली मेहर

गुल-बाँग थी गुलों की हमारा तराना था

हातिम अली मेहर

रौशन जमाल-ए-यार से है अंजुमन तमाम

हसरत मोहानी

कब तलक पीवेगा तू तर-दामनों से मिल के मुल

हसरत अज़ीमाबादी

बदन से रूह हम-आग़ोश होने वाली थी

हाशिम रज़ा जलालपुरी

तारीख़ की अदालत

हसन हमीदी

आई क्या जी में तेग़-ए-क़ातिल के

हसन बरेलवी

हुस्न जब मक़्तल की जानिब तेग़-ए-बुर्राँ ले चला

हसन बरेलवी

हुस्न जब मक़्तल की जानिब तेग़-ए-बुर्राँ ले चला

हसन बरेलवी

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