तेग Poetry (page 5)

दिल मत टपक नज़र से कि पाया न जाएगा

मोहम्मद रफ़ी सौदा

बे-वज्ह नईं है आइना हर बार देखना

मोहम्मद रफ़ी सौदा

कभी तेग़-ए-तेज़ सुपुर्द की कभी तोहफ़ा-ए-गुल-ए-तर दिया

सरवत हुसैन

ऐसे लगे है नौकरी माल-ए-हराम के बग़ैर

सरफ़राज़ शाहिद

रुख़ पर है मलाल आज कैसा

सख़ी लख़नवी

बाँध के सफ़ हों सब खड़े तेग़ के साथ सर झुके

साहिर भोपाली

नवादिरात की दूकान

साग़र ख़य्यामी

ये हादसा है बता दे कोई ज़माने को

साग़र ख़य्यामी

ये कोई बात है सुनता न बाग़बाँ मेरी

रियाज़ ख़ैराबादी

वो हों मुट्ठी में उन की दिल हो हम हों

रियाज़ ख़ैराबादी

न आया हमें इश्क़ करना न आया

रियाज़ ख़ैराबादी

इश्क़ में दिल-लगी सी रहती है

रियाज़ ख़ैराबादी

छेड़ते हैं गुदगुदाते हैं फिर अरमाँ आज-कल

रियाज़ ख़ैराबादी

बाला-ए-बाम ग़ैर है में आस्तान पर

रियाज़ ख़ैराबादी

जलन दिल की लिक्खें जो हम दिल-जले

रिन्द लखनवी

बिछड़ते वक़्त तो कुछ उस में ग़म-गुसारी थी

राज़ी अख्तर शौक़

इश्क़ के जाँ-निसार जीते हैं

रज़ा अज़ीमाबादी

दिल तक हो चाक तेग़ जो सर पर लगाइए

रौनक़ टोंकवी

मौजों ने हाथ दे के उभारा कभी कभी

रतन पंडोरवी

अहल-ए-नज़र की आँख में हुस्न की आबरू नहीं

रशीद रामपुरी

न छोड़ा दिल-ए-ख़स्ता-जाँ चलते चलते

रशीद लखनवी

कभी गेसू न बिगड़े क़ातिल के

रशीद लखनवी

जब से सुना दहन तिरे ऐ माह-रू नहीं

रशीद लखनवी

हिज्र है अब था यहीं में ज़ार हम पहलू-ए-दोस्त

रशीद लखनवी

है बे-ख़ुद वस्ल में दिल हिज्र में मुज़्तर सिवा होगा

रशीद लखनवी

गर्म रफ़्तार है तेरी ये पता देते हैं

रशीद लखनवी

दिला मा'शूक़ जो होता है वो सफ़्फ़ाक होता है

रशीद लखनवी

आप दिल जा कर जो ज़ख़्मी हो तो मिज़्गाँ क्या करे

रशीद लखनवी

'रसा' को दिल में रखते हैं 'रसा' के जानने वाले

रसा रामपुरी

नीची नज़रों से न देखो सर-ए-महशर देखो

रसा रामपुरी

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