वफ़ा Poetry (page 24)

सज़ा का हाल सुनाएँ जज़ा की बात करें

साहिर लुधियानवी

न तो ज़मीं के लिए है न आसमाँ के लिए

साहिर लुधियानवी

जुर्म-ए-उल्फ़त पे हमें लोग सज़ा देते हैं

साहिर लुधियानवी

जब कभी उन की तवज्जोह में कमी पाई गई

साहिर लुधियानवी

हवस-नसीब नज़र को कहीं क़रार नहीं

साहिर लुधियानवी

गो मसलक-ए-तस्लीम-ओ-रज़ा भी है कोई चीज़

साहिर लुधियानवी

देखा है ज़िंदगी को कुछ इतना क़रीब से

साहिर लुधियानवी

बुझा दिए हैं ख़ुद अपने हाथों मोहब्बतों के दिए जला के

साहिर लुधियानवी

बरबाद-ए-मोहब्बत की दुआ साथ लिए जा

साहिर लुधियानवी

अपना दिल पेश करूँ अपनी वफ़ा पेश करूँ

साहिर लुधियानवी

अहल-ए-दिल और भी हैं अहल-ए-वफ़ा और भी हैं

साहिर लुधियानवी

फिर किसी बेवफ़ा की याद आई

साहिर होशियारपुरी

हर एक फूल के दामन में ख़ार कैसा है

साहिर होशियारपुरी

अहद-ए-मीसाक़ का लाज़िम है अदब ऐ वाइ'ज़

साहिर देहल्वी

जुनूँ के जोश में जिस ने मोहब्बत को हुनर जाना

साहिर देहल्वी

फ़ज़ा-ए-आलम-ए-क़ुदसी में है नश्व-ओ-नुमा मेरी

साहिर देहल्वी

बुत-परस्ती के सनम-ख़ाने का आसार न तोड़

साहिर देहल्वी

सवाल-ए-सुब्ह-ए-चमन ज़ुल्मत-ए-ख़िज़ाँ से उठा

सहबा अख़्तर

असनाम-ए-माल-ओ-ज़र की परस्तिश सिखा गई

सहबा अख़्तर

असनाम-ए-माल-ओ-ज़र की परस्तिश सिखा गई

सहबा अख़्तर

हम दिल की निगाहों से जहाँ देख रहे हैं

सहर महमूद

दास्ताँ क्या थी और क्या बना दी गई

सहर महमूद

दर्द की सूरत में वो उम्दा सा तोहफ़ा दे गया

सहर महमूद

हिसाब-ए-शब

सहर अंसारी

मन के मंदिर में है उदासी क्यूँ

सहर अंसारी

महसूस क्यूँ न हो मुझे बेगानगी बहुत

सहर अंसारी

कहीं वो चेहरा-ए-ज़ेबा नज़र नहीं आया

सहर अंसारी

हवस ओ वफ़ा की सियासतों में भी कामयाब नहीं रहा

सहर अंसारी

अब यही रंज-ए-बे-दिली मुझ को मिटाए या बनाए

सहर अंसारी

काम आई इश्क़ की दीवानगी कल रात को

सग़ीर अहमद सूफ़ी

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