वफ़ा Poetry (page 26)

मैं जिस के साथ 'ज़फ़र' उम्र भर उठा बैठा

साबिर ज़फ़र

ख़िज़ाँ की रुत है जनम-दिन है और धुआँ और फूल

साबिर ज़फ़र

कोई मसरूफ़ियत होगी वगर्ना मस्लहत होगी

सबिहा सबा, न्यूयार्क

ये सैल-ए-अश्क मुझे गुफ़्तुगू की ताब तो दे

सबिहा सबा, न्यूयार्क

नहीं जाने है वो हर्फ़-ए-सताइश बरमला कहना

सबिहा सबा, न्यूयार्क

दुरुस्त है कि ये दिन राएगाँ नहीं गुज़रे

सबिहा सबा, न्यूयार्क

ब-ज़ाहिर रौनक़ों में बज़्म-आराई में जीते हैं

सबिहा सबा, न्यूयार्क

बस अना को बहाल रखना है

सबीला इनाम सिद्दीक़ी

आप के लब पे और वफ़ा की क़सम

सबा अकबराबादी

उलझनों में कैसे इत्मीनान-ए-दिल पैदा करें

सबा अकबराबादी

तुझ से दामन-कशाँ नहीं हूँ मैं

सबा अकबराबादी

पूरी मिरे जुनूँ की ज़रूरत न कर सके

सबा अकबराबादी

अजल होती रहेगी इश्क़ कर के मुल्तवी कब तक

सबा अकबराबादी

कारवाँ लुट गया राहबर छुट गया रात तारीक है ग़म का यारा नहीं

सबा अफ़ग़ानी

अमानत मोहतसिब के घर शराब-ए-अर्ग़वाँ रख दी

साइल देहलवी

उदास मौसम के रतजगों में

सादुल्लाह शाह

जिंस-ए-वफ़ा का दहर में बाज़ार गिर गया

एस ए मेहदी

कैफ़-ए-सुरूर-ओ-सोज़ के क़ाबिल नहीं रहा

एस ए मेहदी

मुँह-ज़ोर आरज़ूओं की बे-मेहरियाँ न पूछ

रूही कंजाही

निकालो कोई तो सूरत कि तीरगी कम हो

रोहित सोनी ‘ताबिश’

गरचे मिरे ख़ुलूस से वो बे-ख़बर न था

रोहित सोनी ‘ताबिश’

तुम्हारी याद तुम्हारा ख़याल काफ़ी है

रिज़वानूरर्ज़ा रिज़वान

ज़िद हमारी दुआ से होती है

रियाज़ ख़ैराबादी

थी ज़र्फ़-ए-वज़ू में कोई शय पी गए क्या आप

रियाज़ ख़ैराबादी

सितम-ए-ना-रवा को रोते हैं

रियाज़ ख़ैराबादी

कोई पूछे न हम से क्या हुआ दिल

रियाज़ ख़ैराबादी

कल क़यामत है क़यामत के सिवा क्या होगा

रियाज़ ख़ैराबादी

दर्द हो तो दवा करे कोई

रियाज़ ख़ैराबादी

दर्द हो तो दवा करे कोई

रियाज़ ख़ैराबादी

अगर उन के लब पर गिला है किसी का

रियाज़ ख़ैराबादी

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