वफ़ा Poetry (page 27)

ज़माने में वो मह-लक़ा एक है

रिन्द लखनवी

तू आप को पोशीदा ओ इख़्फ़ा न समझना

रिन्द लखनवी

छुप के घर ग़ैर के जाया न करो

रिन्द लखनवी

ऐसे बीमार की दवा क्या है

रिफ़अत ज़मानी बेगम इस्मत

रहा असीर कई साल नक़्श-ए-पा की तरह

रिफ़अत सुलतान

नादान दिल-फ़रेब मोहब्बत न खा कभी

रिफ़अत सुलतान

ना-आश्ना-ए-दर्द नहीं बेवफ़ा नहीं

रिफ़अत सुलतान

हुए जब से मोहब्बत-आश्ना हम

रिफ़अत सुलतान

मोहब्बत में वफ़ा वालों को कब ईज़ा सताती है

रिफ़अत सेठी

लोग उट्ठे हैं तिरी बज़्म से क्या क्या हो कर

रिफ़अत सेठी

होते हैं ख़त्म अब ये लम्हात ज़िंदगी के

रिफ़अत सेठी

एक बे-रंग से ग़ुबार में हूँ

रिफ़अत सरोश

दीबाचा-ए-किताब-ए-वफ़ा है तमाम उम्र

रिफ़अत सरोश

बुझा बुझा के जलाता है दिल का शो'ला कौन

रिफ़अत सरोश

हम फ़लक के आदमी थे साकिनान-ए-क़र्या-ए-महताब थे

रियाज़ मजीद

नज़र उठाएँ तो क्या क्या फ़साना बनता है

रहमान फ़ारिस

बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं

रहमान फ़ारिस

बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं

रहमान फ़ारिस

ताज़ियत की खोखली है रस्म जारी आज-कल

रेहान अल्वी

मैं कहाँ और अर्ज़-ए-हाल कहाँ

राज़ी अख्तर शौक़

मुहक़क़िक़

रज़ा नक़वी वाही

वास्ता कोई न रख कर भी सितम ढाते हो तुम

रज़ा लखनवी

फिर राह दिखा मुझ को ऐ मशरब-ए-रिंदाना

रज़ा जौनपुरी

पास-ए-आदाब-ए-वफ़ा था कि शिकस्ता-पाई

रज़ा हमदानी

ज़ख़्म कुछ ऐसे मिरे क़ल्ब-ओ-जिगर ने पाए

रज़ा हमदानी

ये किस मक़ाम पे ठहरा है कारवान-ए-वफ़ा

रज़ा हमदानी

नाज़ का मारा हुआ हूँ मैं अदा की सौगंद

रज़ा अज़ीमाबादी

मैं ही नहीं हूँ बरहम उस ज़ुल्फ़-ए-कज-अदा से

रज़ा अज़ीमाबादी

लाज़िम है बुलंद आह की रायत न करे तू

रज़ा अज़ीमाबादी

भर नज़र देखेंगे हम उस को मिला जानाँ अगर

रज़ा अज़ीमाबादी

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.