वफ़ा Poetry (page 29)

माना वो एक ख़्वाब था धोका नज़र का था

रशीद क़ैसरानी

माना वो एक ख़्वाब था धोका नज़र का था

रशीद क़ैसरानी

गुम्बद-ए-ज़ात में अब कोई सदा दूँ तो चलूँ

रशीद क़ैसरानी

शुरूअ' अहल-ए-मोहब्बत के इम्तिहान हुए

रशीद लखनवी

मार डालेगी हमें ये ख़ुश-बयानी आप की

रशीद लखनवी

है बे-ख़ुद वस्ल में दिल हिज्र में मुज़्तर सिवा होगा

रशीद लखनवी

हाए शर्म-ए-दिलबरी उस दिलरुबा के हाथ है

रशीद लखनवी

तरह-ए-कशां जिसे हिज्रान-ए-यार कहते हैं

रशीद कौसर फ़ारूक़ी

रिश्ता-ए-दिल भी किसी दिन ख़्वाब सा हो जाएगा

रशीद कामिल

दिल की इमारत झूटे जज़्बों पर ता'मीर नहीं करना

रशीद अयाँ

'रसा' को दिल में रखते हैं 'रसा' के जानने वाले

रसा रामपुरी

पी के कर लेता हूँ तौबा जब से ये दस्तूर है

रसा रामपुरी

नीची नज़रों से न देखो सर-ए-महशर देखो

रसा रामपुरी

जी चाहा जिधर छोड़ दिया तीर अदा को

रसा रामपुरी

जनाज़ा धूम से उस आशिक़-ए-जाँ-बाज़ का निकले

रंजूर अज़ीमाबादी

घर है तिरा तू शौक़ से आने के लिए आ

रम्ज़ आफ़ाक़ी

तुझ से मैं मुझ से आश्ना तुम हो

रमेश कँवल

कभी बुलाओ, कभी मेरे घर भी आया करो

रमेश कँवल

गुज़िश्ता अहल-ए-सफ़र को जहाँ सुकून मिला

राम रियाज़

आज तो रोने को जी हो जैसे

राजेन्द्र मनचंदा बानी

सफ़र में अब के अजब तजरबा निकल आया

राजेश रेड्डी

घर से निकले थे हौसला कर के

राजेश रेड्डी

महताब नहीं निकला सितारे नहीं निकले

राजेन्द्र नाथ रहबर

गुज़ारे तुम ने कैसे रोज़-ओ-शब हम से ख़फ़ा हो कर

राज कुमार सूरी नदीम

शमएँ जुगनू चाँद के हाले जम्अ करो

राज खेती

शमएँ जुगनू चाँद के हाले जम्अ' करो

राज खेती

तिरे सुलूक का ग़म सुब्ह-ओ-शाम क्या करते

रईस सिद्दीक़ी

हँसी हँसी में हर इक ग़म छुपाने आते हैं

रईस सिद्दीक़ी

घर में सहरा है तो सहरा को ख़फ़ा कर देखो

रईस फ़रोग़

ये कर्बला है नज़्र-ए-बला हम हुए कि तुम

रईस अमरोहवी

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