वफ़ा Poetry (page 28)

पचास सालों में दो इक बरस का रिश्ता था

रज़ा अश्क

लगी है भीड़ बड़ा मय-कदे का नाम भी है

रविश सिद्दीक़ी

दौर-ए-सबूही शोला-ए-मीना रक़्साँ छाँव में तारों की

रविश सिद्दीक़ी

बादा-ए-गुल को सब अंदोह-रुबा कहते हैं

रविश सिद्दीक़ी

उन के जाने से ये दिल में हुई सूरत पैदा

रौनक़ टोंकवी

न बातें कीं न तस्कीं दी न पहलू में ज़रा ठहरे

रौनक़ टोंकवी

अँधेरी खाई से गोया सफ़र चटान का था

रौनक़ रज़ा

दरवाज़ा मायूस है शायद सोग में है अँगनाई बहुत

रौनक़ नईम

चाक दामन भी हुआ चाक-ए-गरेबाँ की तरह

रऊफ़ यासीन जलाली

मौजों ने हाथ दे के उभारा कभी कभी

रतन पंडोरवी

ख़्वाब ही में रुख़-ए-पुर-नूर दिखाए कोई

रतन पंडोरवी

शेवा-ए-ज़ब्त को रुस्वा दिल-ए-नाशाद न कर

रसूल जहाँ बेगम मख़फ़ी बदायूनी

कुछ हद भी ऐ फ़लक सितम-ए-ना-रवा की है

रसूल जहाँ बेगम मख़फ़ी बदायूनी

मैं जंग जीत के जब्र-ओ-अना की हार गया

रासिख़ इरफ़ानी

बाज़ार जहाँ में कोई ख़्वाहाँ नहीं तेरा

रासिख़ अज़ीमाबादी

तुम्हें ऐसा बे-रहम जाना न था

रासिख़ अज़ीमाबादी

ममनूँ ही रहा उस बुत-ए-काफ़िर की जफ़ा का

रासिख़ अज़ीमाबादी

न जाने कब बसर हुए न जाने कब गुज़र गए

रशक खलीली

साक़ी-ए-रंगीं-अदा था बादा-ए-गुलफ़ाम था

रशीद शाहजहाँपुरी

साक़ी-ए-रंगीं-अदा था बादा-ए-गुलफ़ाम था

रशीद शाहजहाँपुरी

जिस को देखो एहतिसाब-ए-ज़ीस्त से ग़ाफ़िल है आज

रशीद शाहजहाँपुरी

ब-क़द्र-ए-हसरत-ए-दिल ज़ुल्म भी ढाना नहीं आता

रशीद शाहजहाँपुरी

ब-क़द्र-ए-हसरत-ए-दिल ज़ुल्म भी ढाना नहीं आता

रशीद शाहजहाँपुरी

आँखों आँखों में मोहब्बत का पयाम आ ही गया

रशीद शाहजहाँपुरी

हर ख़ुशी तेरे नाम की मैं ने

राशिद क़य्यूम अनसर

सुब्ह-ए-क़यामत जिन होंटों पे दिलासे देखे

राशिद आज़र

मालूम है वो मुझ से ख़फ़ा है भी नहीं भी

राशिद आज़र

ख़याल की तरह चुप हो सदा हुए होते

राशिद आज़र

तर्क-ए-सितम पे वो जो क़सम खा के रह गए

रशीद रामपुरी

छुट गए हम जो असीर-ए-ग़म-ए-हिज्राँ हो कर

रशीद रामपुरी

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.