याद Poetry (page 32)

तुम्हारी याद को हम ने पलक पर यूँ सजा रक्खा

संजीव आर्या

ख़राब हो गया जब मेरे जिस्म का काग़ज़

संजय मिश्रा शौक़

आना ये हिचकियों का मुझे बे-सबब नहीं

सनाउल्लाह फ़िराक़

ये रस्ता

समीना राजा

समुंदर की ख़ुश्बू

समीना राजा

इक उम्र की देर

समीना राजा

कब इस से क़ब्ल नज़र में गुल-ए-मलाल खिला

समीना राजा

दिल माँगे है मौसम फिर उम्मीदों का

समीना राजा

आसेब-सिफ़त ये मिरी तन्हाई अजब है

समीना राजा

दुनिया का ज़र्रा ज़र्रा मियाँ इश्क़ इश्क़ है

सलमान ज़फ़र

बग़दाद

सलमान अंसारी

इक वही शख़्स मुझ को याद रहा

सलमान अख़्तर

वो पास रह के भी मुझ में समा नहीं सकता

सलमान अख़्तर

थी ये उम्मीद कि वो लौट के घर आएगा

सलमा शाहीन

तआ'क़ुब मेरा ख़ुशबू कर रही थी

सलमा शाहीन

अब ख़यालों का जहाँ और न आबाद करें

सलमा शाहीन

मुझे जब भी कभी तेरी कमी महसूस होती है

सलीम शुजाअ अंसारी

कभी मिली है जो फ़ुर्सत तो ये हिसाब किया

सलीम शुजाअ अंसारी

ज़ेहन की क़ैद से आज़ाद किया जाए उसे

सालिम सलीम

काम हर रोज़ ये होता है किस आसानी से

सालिम सलीम

कुछ तग़य्युर मिरे अहवाल-ए-परेशाँ में नहीं

सालिक देहलवी

अब शहर की और दश्त की है एक कहानी

सलीम शाहिद

पुराने साहिलों पर नया गीत

सलीम कौसर

याद कहाँ रखनी है तेरा ख़्वाब कहाँ रखना है

सलीम कौसर

वो जो हम-रही का ग़ुरूर था वो सवाद-ए-राह में जल-बुझा

सलीम कौसर

वो आँखें जिन से मुलाक़ात इक बहाना हुआ

सलीम कौसर

सफ़र की इब्तिदा हुई कि तेरा ध्यान आ गया

सलीम कौसर

मोहलत न मिली ख़्वाब की ताबीर उठाते

सलीम कौसर

लौ को छूने की हवस में एक चेहरा जल गया

सलीम कौसर

कोई याद ही रख़्त-ए-सफ़र ठहरे कोई राहगुज़र अनजानी हो

सलीम कौसर

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