याद Poetry (page 54)

मैं वो बस्ती हूँ कि याद-ए-रफ़्तगाँ के भेस में

हफ़ीज़ जालंधरी

हम ही में थी न कोई बात याद न तुम को आ सके

हफ़ीज़ जालंधरी

हाँ कैफ़-ए-बे-ख़ुदी की वो साअत भी याद है

हफ़ीज़ जालंधरी

दिल को ख़ुदा की याद तले भी दबा चुका

हफ़ीज़ जालंधरी

भुलाई नहीं जा सकेंगी ये बातें

हफ़ीज़ जालंधरी

मेरी शाएरी

हफ़ीज़ जालंधरी

एक लड़की शादाँ

हफ़ीज़ जालंधरी

बसंती तराना

हफ़ीज़ जालंधरी

फिर लुत्फ़-ए-ख़लिश देने लगी याद किसी की

हफ़ीज़ जालंधरी

न कर दिल-जूई ऐ सय्याद मेरी

हफ़ीज़ जालंधरी

मुझे शाद रखना कि नाशाद रखना

हफ़ीज़ जालंधरी

मुद्दतों तक जो पढ़ाया किया उस्ताद मुझे

हफ़ीज़ जालंधरी

मिटने वाली हसरतें ईजाद कर लेता हूँ मैं

हफ़ीज़ जालंधरी

जहाँ क़तरे को तरसाया गया हूँ

हफ़ीज़ जालंधरी

हम ही में थी न कोई बात याद न तुम को आ सके

हफ़ीज़ जालंधरी

है अज़ल की इस ग़लत बख़्शी पे हैरानी मुझे

हफ़ीज़ जालंधरी

दिल से तिरा ख़याल न जाए तो क्या करूँ

हफ़ीज़ जालंधरी

चले थे हम कि सैर-ए-गुलशन-ए-ईजाद करते हैं

हफ़ीज़ जालंधरी

ऐ दोस्त मिट गया हूँ फ़ना हो गया हूँ मैं

हफ़ीज़ जालंधरी

आख़िर एक दिन शाद करोगे

हफ़ीज़ जालंधरी

कहीं ये तर्क-ए-मोहब्बत की इब्तिदा तो नहीं

हफ़ीज़ होशियारपुरी

दुनिया में हैं काम बहुत

हफ़ीज़ होशियारपुरी

तमाम उम्र तिरा इंतिज़ार हम ने किया

हफ़ीज़ होशियारपुरी

न पूछ क्यूँ मिरी आँखों में आ गए आँसू

हफ़ीज़ होशियारपुरी

मन-ओ-तू का हिजाब उठने न दे ऐ जान-ए-यकताई

हफ़ीज़ होशियारपुरी

कुछ इस तरह से नज़र से गुज़र गया कोई

हफ़ीज़ होशियारपुरी

अब कोई आरज़ू नहीं शौक़-ए-पयाम के सिवा

हफ़ीज़ होशियारपुरी

किस मुँह से करें उन के तग़ाफ़ुल की शिकायत

हफ़ीज़ बनारसी

ये कैसी हवा-ए-ग़म-ओ-आज़ार चली है

हफ़ीज़ बनारसी

तेज़ जब ख़ंजर-ए-बेदाद किया जाएगा

हफ़ीज़ बनारसी

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