यार Poetry (page 18)

जो रक़ीबों ने कहा तू वही बद-ज़न समझा

शाह नसीर

जिगर का जूँ शम्अ काश या-रब हो दाग़ रौशन मुराद हासिल

शाह नसीर

इस दिल को हम-कनार किया हम ने क्या किया

शाह नसीर

हो चुकी बाग़ में बहार अफ़सोस

शाह नसीर

गो सियह-बख़्त हूँ पर यार लुभा लेता है

शाह नसीर

देख तू यार-ए-बादा-कश! मैं ने भी काम क्या किया

शाह नसीर

चश्म में कब अश्क भर लाते हैं हम

शाह नसीर

बे-मेहर-ओ-वफ़ा है वो दिल-आराम हमारा

शाह नसीर

बादा-कशी के सिखलाते हैं क्या ही क़रीने सावन-भादों

शाह नसीर

जूँ क़दम यार ने घर से मिरे दर पर रक्खा

शाह कमालउद्दीन कमाल

बुझते हुए शो'लों को हुआ क्यूँ नहीं देते

शाह जी अली

ये किस के सोज़ का है बज़्म-ए-जाँ में इंतिज़ार ऐ दिल

शाह दीन हुमायूँ

है अयाँ रू-ए-यार आँखों में

शाह आसिम

सुब्हा से है न काम न ज़ुन्नार से ग़रज़

शाह आसिम

सन लेवे अगर तू मिरी दिलदार की आवाज़

शाह आसिम

मुझे साक़ी-ए-चश्म-ए-यार ने अजब एक जाम पिला दिया

शाह आसिम

इस दिल में अगर जल्वा-ए-दिल-दार न होता

शाह आसिम

है अयाँ रू-ए-यार आँखों में

शाह आसिम

दस्तियाब उस को हुआ जब से है गुल-दस्ता-ए-दाग़

शाह आसिम

बंदा-ए-इश्क़ हूँ जुज़ यार मुझे काम नहीं

शाह आसिम

अफ़्साना मिरे दिल का दिल-आज़ार से कह दो

शाह आसिम

मौसम-ए-गुल आ गया फिर दश्त-पैमाई रहे

शाग़िल क़ादरी

क़ुर्बत-ए-हुस्न में भी दर्द के आसार मिले

शफ़क़त तनवीर मिर्ज़ा

अब जा कर एहसास हुआ है प्यार भी करना था

शफ़ीक़ सलीमी

भरी महफ़िल में तन्हाई का आलम ढूँड लेता है

शफ़ीक़ ख़लिश

ऐसी नींद आई कि फिर मौत को प्यार आ ही गया

शफ़ीक़ जौनपुरी

दीवानगी-ए-शौक़ का सामाँ सजा के ला

शफ़ीक़ देहलवी

ज़बाँ ख़मोश रहे तर्क-ए-मुद्दआ न करे

शायर फतहपुरी

जो कैफ़-ए-इश्क़ से ख़ाली हो ज़िंदगी किया है

शायर फतहपुरी

विसाल-ए-यार से दूना हुआ इश्क़

शाद लखनवी

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