यार Poetry (page 2)

जिस्म-ए-अनवर की लताफ़त की सना क्या कीजे

ज़ेबा

हुआ है इश्क़ में कम हुस्न-ए-इत्तिफ़ाक़ ऐसा

ज़ेबा

पेच दे ज़ुल्फ़-ए-अम्बरीं न कहीं

ज़ेबा

न होगा हश्र महशर में बपा क्या

ज़ेबा

क्यूँ हो न गिर के कासा-ए-तदबीर पाश पाश

ज़ेबा

क्या मिला क़ैस को गर्द-ए-रह-ए-सहरा हो कर

ज़ेबा

किस शेर में सना-ए-रुख़-ए-मह-जबीं नहीं

ज़ेबा

जफ़ा-पसंदों को सुनते हैं ना-पसंद हुआ

ज़ेबा

फ़िराक़ में ख़ून-ए-दिल हैं पीते शराब हम ले के क्या करेंगे

ज़ेबा

फ़ैसला क्या हो जान-ए-बिस्मिल का

ज़ेबा

तलाश एक बहाना था ख़ाक उड़ाने का

ज़ेब ग़ौरी

उस के क़ुर्ब के सारे ही आसार लगे

ज़ेब ग़ौरी

पहले मुझ को भी ख़याल-ए-यार का धोका हुआ

ज़ेब ग़ौरी

है सदफ़ गौहर से ख़ाली रौशनी क्यूँकर मिले

ज़ेब ग़ौरी

ढला न संग के पैकर में यार किस का था

ज़ेब ग़ौरी

बहार कौन सी तुझ में जमाल-ए-यार न थी

ज़ेब ग़ौरी

ज़िंदगी ख़ार-ज़ार में गुज़री

ज़रीना सानी

तमन्ना है किसी की तेग़ हो और अपनी गर्दन हो

ज़रीफ़ लखनवी

फ़िल्मी इश्क़

ज़रीफ़ जबलपूरी

सुकूत-ए-शब में दिल-ए-दाग़-दाग़ रौशन है

ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर

इस बज़्म-ए-तसव्वुर में बस यार की बातें हैं

ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर

हिज्र का ये कर्ब सारा बे-असर हो जाएगा

ज़ाकिर ख़ान ज़ाकिर

गुलशन-ए-ख़ुल्द में हर-चंद कि दिल बहलाया

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

उस पे करना मिरे नालों ने असर छोड़ दिया

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

रात याद-ए-निगह-ए-यार ने सोने न दिया

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

क़ाइल भला हों नामा-बरी में सबा के ख़ाक

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

ना-तवानी में पलक को भी हिलाया न गया

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

जहाँ से दोश-ए-अज़ीज़ाँ पे बार हो के चले

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

इस दर पे मुझे यार मचलने नहीं देते

ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़

वही लड़की वही लड़का पुराना

ज़ाहिद फ़ारानी

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