यार Poetry (page 45)

क़र्ज़-ए-निगाह-ए-यार अदा कर चुके हैं हम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

न गँवाओ नावक-ए-नीम-कश दिल-ए-रेज़ा-रेज़ा गँवा दिया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

कुछ पहले इन आँखों आगे क्या क्या न नज़ारा गुज़रे था

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

किए आरज़ू से पैमाँ जो मआल तक न पहुँचे

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

किसी गुमाँ पे तवक़्क़ो' ज़ियादा रखते हैं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

जैसे हम-बज़्म हैं फिर यार-ए-तरह-दार से हम

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हम मुसाफ़िर यूँही मसरूफ़-ए-सफ़र जाएँगे

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ग़म-ब-दिल शुक्र-ब-लब मस्त ओ ग़ज़ल-ख़्वाँ चलिए

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

फ़िक्र-ए-दिलदारी-ए-गुलज़ार करूँ या न करूँ

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आज यूँ मौज-दर-मौज ग़म थम गया इस तरह ग़म-ज़दों को क़रार आ गया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

ऐ यार नसीहत को अगर गोश करे तू

फ़ाएज़ देहलवी

अबरू ने तिरे खींची कमाँ जौर-ओ-जफ़ा पर

फ़ाएज़ देहलवी

राह-ए-तलब में अहल-ए-दिल जब हद-ए-आम से बढ़े

एजाज़ वारसी

मैं ने क्या काम ला-जवाब किया

एजाज़ उबैद

हँसने में रोने की आदत कभी ऐसी तो न थी

एजाज़ उबैद

पेचाक-ए-उम्र अपने सँवार आइने के साथ

एजाज़ गुल

इस्तादा है जब सामने दीवार कहूँ क्या

एजाज़ गुल

किस दिल से हम इरादा-ए-तर्क-ए-जुनूँ करें

एजाज़ अासिफ़

तुझे भी हुस्न-ए-मुत्लक़ का अभी दीदार हो जाए

अहया भोजपुरी

यूँ उस पे मिरी अर्ज़-ए-तमन्ना का असर था

एहसान दानिश

इश्क़ का परचा

दिलावर फ़िगार

शोर से बच्चों के घबराते हैं घर पर और हम

दिलावर फ़िगार

हुस्न पर ए'तिबार हद कर दी

दिलावर फ़िगार

अजब अख़बार लिक्खा जा रहा है

दिलावर फ़िगार

सारे नुक़ूश जिस पे तिरे आशियाँ के हैं

दिल अय्यूबी

मुट्ठी में दो-चार नहीं

दीपक शर्मा दीप

ज़रा निगाह उठाओ कि ग़म की रात कटे

द्वारका दास शोला

एक रहज़न को अमीर-ए-कारवाँ समझा था मैं

द्वारका दास शोला

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