यार Poetry (page 46)

तहज़ीब की आयत

दाऊद ग़ाज़ी

निगाह-ए-यार सूँ हासिल है मुझ कूँ मय-नोशी

दाऊद औरंगाबादी

मुझ साथ सैर-ए-बाग़ कूँ ऐ नौ-बहार चल

दाऊद औरंगाबादी

मिरा अहवाल चश्म-ए-यार सूँ पूछ

दाऊद औरंगाबादी

मस्त हूँ मस्त हूँ ख़राब ख़राब

दाऊद औरंगाबादी

ले दाम-ए-निगाह-ए-यार आया

दाऊद औरंगाबादी

जग है मुश्ताक़ पिव के दर्शन का

दाऊद औरंगाबादी

जब मिला यार तू अग़्यार सेती क्या मतलब

दाऊद औरंगाबादी

दिल में ख़याल-ए-यार है जासूस की नमत

दाऊद औरंगाबादी

आज बदली है हवा साक़ी पिला जाम-ए-शराब

दाऊद औरंगाबादी

ढूँढने से यूँ तो इस दुनिया में क्या मिलता नहीं

दत्तात्रिया कैफ़ी

इश्क़ शबनम नहीं शरारा है

दर्शन सिंह

'दर्द' के मिलने से ऐ यार बुरा क्यूँ माना

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

बाग़-ए-जहाँ के गुल हैं या ख़ार हैं तो हम हैं

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

तुझी को जो याँ जल्वा-फ़रमा न देखा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

क़त्ल-ए-आशिक़ किसी माशूक़ से कुछ दूर न था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

इश्क़ हर-चंद मिरी जान सदा खाता है

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

बाग़-ए-जहाँ के गुल हैं या ख़ार हैं तो हम हैं

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

तुम अगर अपनी गूँ के हो माशूक़

दाग़ देहलवी

ग़श खा के 'दाग़' यार के क़दमों पे गिर पड़ा

दाग़ देहलवी

चुप-चाप सुनती रहती है पहरों शब-ए-फ़िराक़

दाग़ देहलवी

उज़्र उन की ज़बान से निकला

दाग़ देहलवी

उस के दर तक किसे रसाई है

दाग़ देहलवी

उन के इक जाँ-निसार हम भी हैं

दाग़ देहलवी

पुकारती है ख़मोशी मिरी फ़ुग़ाँ की तरह

दाग़ देहलवी

मुझ सा न दे ज़माने को परवरदिगार दिल

दाग़ देहलवी

हाथ निकले अपने दोनों काम के

दाग़ देहलवी

ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया

दाग़ देहलवी

दिल मुब्तला-ए-लज़्ज़त-ए-आज़ार ही रहा

दाग़ देहलवी

बाक़ी जहाँ में क़ैस न फ़रहाद रह गया

दाग़ देहलवी

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