यार Poetry (page 48)

कुछ बे-अदबी और शब-ए-वस्ल नहीं की

बेगम लखनवी

बरसों ग़म-ए-गेसू में गिरफ़्तार तो रक्खा

बेगम लखनवी

बहुत ज़ोरों पे वी-सी-आर था कल शब जहाँ मैं था

बेदिल जौनपूरी

मिरी दास्तान-ए-अलम तो सुन कोई ज़लज़ला नहीं आएगा

बेदिल हैदरी

अब आदमी कुछ और हमारी नज़र में है

बेदम शाह वारसी

तेरी उल्फ़त शोबदा-पर्वाज़ है

बेदम शाह वारसी

सहारा मौजों का ले ले के बढ़ रहा हूँ मैं

बेदम शाह वारसी

क़फ़स की तीलियों से ले के शाख़-ए-आशियाँ तक है

बेदम शाह वारसी

पर्दे उठे हुए भी हैं उन की इधर नज़र भी है

बेदम शाह वारसी

मुझे शिकवा नहीं बर्बाद रख बर्बाद रहने दे

बेदम शाह वारसी

में ग़श में हूँ मुझे इतना नहीं होश

बेदम शाह वारसी

मैं यार का जल्वा हूँ

बेदम शाह वारसी

काश मिरी जबीन-ए-शौक़ सज्दों से सरफ़राज़ हो

बेदम शाह वारसी

कभी यहाँ लिए हुए कभी वहाँ लिए हुए

बेदम शाह वारसी

गुल का किया जो चाक गरेबाँ बहार ने

बेदम शाह वारसी

छिड़ा पहले-पहल जब साज़-ए-हस्ती

बेदम शाह वारसी

बुत भी इस में रहते थे दिल यार का भी काशाना था

बेदम शाह वारसी

बड़ी दिल-शिकन है रह-ए-सफ़र कोई हम-सफ़र है न यार है

बेबाक भोजपुरी

ज़ुल्फ़ तेरी ने परेशाँ किया ऐ यार मुझे

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

या रब न हिन्द ही में ये माटी ख़राब हो

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

रात उस तुनुक-मिज़ाज से कुछ बात बढ़ गई

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

पूछता कौन है डरता है तू ऐ यार अबस

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

न फ़क़त यार बिन शराब है तल्ख़

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

कोई किसी का कहीं आश्ना नहीं देखा

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

जा कहे कू-ए-यार में कोई

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

हज़ार कहता रहा मैं कि यार एक मिनट

बासिर सुल्तान काज़मी

इक लम्हा भी गुज़ारूँ भला क्यूँ किसी के साथ

बशीर महताब

लोगो हम छान चुके जा के समुंदर सारे

बशीर फ़ारूक़ी

हम दिल्ली भी हो आए हैं लाहौर भी घूमे

बशीर बद्र

मान मौसम का कहा छाई घटा जाम उठा

बशीर बद्र

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