जीवन Poetry (page 33)

ग़म के मुजरिम ख़ुशी के मुजरिम हैं

साग़र सिद्दीक़ी

नग़्मे हवा ने छेड़े फ़ितरत की बाँसुरी में

साग़र निज़ामी

'साग़र' बहुत गुज़ारी गुनाहों में ज़िंदगी

साग़र ख़य्यामी

इंजीनियर करेंगे अगर डॉक्टर का काम

साग़र ख़य्यामी

क्यूँ दिल तिरे ख़याल का हामिल नहीं रहा

साग़र ख़य्यामी

अब जश्न-ए-अश्क ऐ शब-ए-हिज्राँ करेंगे हम

साग़र ख़य्यामी

देवता मेरे आँगन में उतरेंगे कब ज़िंदगी भर यही सोचता रह गया

साग़र आज़मी

वो हसरत-ए-बहार न तूफ़ान-ए-ज़िंदगी

सफ़िया शमीम

पैग़ाम ज़िंदगी ने दिया मौत का मुझे

सफ़ी लखनवी

तड़प के रात बसर की जो इक मुहिम सर की

सफ़ी लखनवी

पैग़ाम ज़िंदगी ने दिया मौत का मुझे

सफ़ी लखनवी

हुजूम-ए-यास में माँ की दुआ मिलती रही है

सफ़दर सलीम सियाल

रात कितनी बोझल है किस क़दर अँधेरा है

सफ़दर मीर

चार सू हसरतों की पहनाई

सफ़दर ख़ुर्शीद

नज़्म

सईदुद्दीन

गाता हुआ पत्थर

सईदुद्दीन

दस्ताने

सईदुद्दीन

चाहे हमारा ज़िक्र किसी भी ज़बाँ में हो

सईद नक़वी

ग़म रात-दिन रहे तो ख़ुशी भी कभी रही

सईद अख़्तर

किस मुँह से ज़िंदगी को वो रख़्शंदा कह सकें

सादिक़ नसीम

ये इंतिहा-ए-जुनूँ है कि ग़ैर ही सा लगा

सादिक़ इंदौरी

महक रहा है बदन सारा कैसी ख़ुशबू है

सादिक़ इंदौरी

एक पुरानी नज़्म

सादिक़

रास्ते फैले हुए जितने भी थे पत्थर के थे

सदफ़ जाफ़री

बड़ा घाटे का सौदा है 'सदा' ये साँस लेना भी

सदा अम्बालवी

तबीअत रफ़्ता रफ़्ता ख़ूगर-ए-ग़म होती जाती है

सदा अम्बालवी

ये सोच के राख हो गया हूँ

साबिर ज़फ़र

वो क्यूँ न रूठता मैं ने भी तो ख़ता की थी

साबिर ज़फ़र

रात को ख़्वाब हो गई दिन को ख़याल हो गई

साबिर ज़फ़र

नज़र से दूर हैं दिल से जुदा न हम हैं न तुम

साबिर ज़फ़र

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