Nazam Poetry (page 125)

ये बोसे

अज़रा अब्बास

टूटी हुई रस्सी

अज़रा अब्बास

तुम्हारे आने के ब'अद

अज़रा अब्बास

तुम हँसते क्यूँ हो

अज़रा अब्बास

टुकड़ों में बटी हुई ज़िंदगी

अज़रा अब्बास

सेल्फ-पोर्ट्रेट

अज़रा अब्बास

समुंदर की ख़ुश्बू

अज़रा अब्बास

सब दिन एक जैसे नहीं होते

अज़रा अब्बास

नहीं

अज़रा अब्बास

मुझे तक़्सीम कर दो

अज़रा अब्बास

मेज़ पर रखे हाथ

अज़रा अब्बास

मेल उतारना मुश्किल लगता है

अज़रा अब्बास

लफ़्ज़ों के खेल

अज़रा अब्बास

लफ़्ज़ों का ज़वाल

अज़रा अब्बास

ख़ाली बेंच

अज़रा अब्बास

कहें से कोई नुक़्ता आ जाए

अज़रा अब्बास

जिला-वतन होने से पहले

अज़रा अब्बास

इस ज़िंदगी के बदले

अज़रा अब्बास

हम दोनों

अज़रा अब्बास

हाथ खोल दिए जाएँ

अज़रा अब्बास

गिनती

अज़रा अब्बास

फ़ीमेल बुल-फ़ाइटर

अज़रा अब्बास

ए'तिराफ़

अज़रा अब्बास

एक ज़िंदगी और मिल जाए

अज़रा अब्बास

एक नज़्म रोज़ आती है

अज़रा अब्बास

एक नज़्म लिखना मुश्किल है

अज़रा अब्बास

एक नज़्म लिखना आसान है

अज़रा अब्बास

एक नज़्म

अज़रा अब्बास

दिन

अज़रा अब्बास

बाज़ीगर

अज़रा अब्बास