विद्वान Poetry (page 16)

आ अपने दिल में मेरी तमन्ना लिए हुए

सीमाब अकबराबादी

अंजाम ख़ुशी का दुनिया में सच कहते हो ग़म होता है

सययद मोहम्म्द अब्दुल ग़फ़ूर शहबाज़

चेहरे पे न ये नक़ाब देखा

मोहम्मद रफ़ी सौदा

बेचैन जो रखती है तुम्हें चाह किसू की

मोहम्मद रफ़ी सौदा

कुछ और अकेले हुए हम घर से निकल कर

सऊद उस्मानी

अगला सफ़र तवील नहीं

सत्यपाल आनंद

चाँद निकले न कहीं यार पुराने निकले

सरवर नेपाली

इक दास्तान अब भी सुनाते हैं फ़र्श ओ बाम

सरवत हुसैन

देखा जो उस तरफ़ तो बदन पर नज़र गई

सरवत हुसैन

तेरे लिए ईजाद हुआ था लफ़्ज़ जो है रा'नाई का

सरताज आलम आबिदी

ये मैं ने माना कि पहरा है सख़्त रातों का

सरफ़राज़ नवाज़

इबरत-ए-दहर हो गया जब से छुपा मज़ार में

साक़िब लखनवी

न कर तो ऐ दिल मजबूर आह-ए-ज़ेर-ए-लबी

साक़िब कानपुरी

मस्ताना हीजड़ा

साक़ी फ़ारुक़ी

एक सुअर से

साक़ी फ़ारुक़ी

हिसार-ए-तीरगी

सलमान अंसारी

मय-कशी छोड़ दी तौहीन-ए-हुनर कर आया

सलमान अंसारी

पेश-ए-इदराक मिरी फ़िक्र के शाने खुल जाएँ

सलीम शुजाअ अंसारी

अपनी ख़ुद्दारी सलामत दिल का आलम कुछ सही

सालिक लखनवी

कुछ तग़य्युर मिरे अहवाल-ए-परेशाँ में नहीं

सालिक देहलवी

हूँ मैं भी वही मेरा मुक़ाबिल भी वही है

सलीम शाहिद

याद का ज़ख़्म भी हम तुझ को नहीं दे सकते

सलीम कौसर

फिर जी उठे हैं जिस से वो इम्कान तुम नहीं

सलीम कौसर

लय मोहब्बत की है आहंग सुख़न-साज़ का है

सलीम कौसर

कैसे हंगामा-ए-फ़ुर्सत में मिले हैं तुझ से

सलीम कौसर

इस आलम-ए-हैरत-ओ-इबरत में कुछ भी तो सराब नहीं होता

सलीम कौसर

डूबने वाले भी तन्हा थे तन्हा देखने वाले थे

सलीम कौसर

ग़मों की आग पे सब ख़ाल-ओ-ख़द सँवारे गए

सलीम फ़िगार

ग़मों की आग पे सब ख़ाल-ओ-ख़द सँवारे गए

सलीम फ़िगार

नींद से पहले

सलीम अहमद

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