तरीके Poetry (page 16)

ज़िंदगी सादा वरक़ पर इक हसीं तहरीर है

फ़ातिमा वसीया जायसी

सुकून-ए-दिल के लिए इश्क़ तो बहाना था

फ़ातिमा हसन

मैं टूट कर उसे चाहूँ ये इख़्तियार भी हो

फ़ातिमा हसन

मैं टूट कर उसे चाहूँ ये इख़्तियार भी हो

फ़ातिमा हसन

क्या कहूँ उस से कि जो बात समझता ही नहीं

फ़ातिमा हसन

हमारी फ़त्ह के अंदाज़ दुनिया से निराले हैं

फ़सीह अकमल

किताबों से न दानिश की फ़रावानी से आया है

फ़सीह अकमल

ग़ुबार-ए-तंग-ज़ेहनी सूरत-ए-ख़ंजर निकलता है

फ़सीह अकमल

इस तमाशे का सबब वर्ना कहाँ बाक़ी है

फ़रियाद आज़र

गुँध के मिट्टी जो कभी चाक पे आ जाती है

फ़रताश सय्यद

वो न आएगा यहाँ वो नहीं आने वाला

फ़ारूक़ बख़्शी

वो ख़ुद अपना दामन बढ़ाने लगे

फ़ारूक़ बख़्शी

जंग में जाएगा अब मेरा ही सर जान गया

फ़ारूक़ अंजुम

रंग-दर-रंग हिजाबात उठाने होंगे

फ़ारिग़ बुख़ारी

कुछ अब के बहारों का भी अंदाज़ नया है

फ़ारिग़ बुख़ारी

हमें सलीक़ा न आया जहाँ में जीने का

फ़ारिग़ बुख़ारी

आँखों में बसे हो तुम आँखों में अयाँ हो कर

फ़रहत कानपुरी

ये सारे ख़ूबसूरत जिस्म अभी मर जाने वाले हैं

फ़रहत एहसास

तेरे सूरज को तिरी शाम से पहचानते हैं

फ़रहत एहसास

मौत ही एक दवा है और वो जारी है

फ़रहत एहसास

ख़ुद से इंकार को हम-ज़ाद किया है मैं ने

फ़रहत एहसास

ख़लल आया न हक़ीक़त में न अफ़्साना बना

फ़रहत एहसास

दबा पड़ा है कहीं दश्त में ख़ज़ाना मिरा

फ़रहत एहसास

जो भी अंजाम हो आग़ाज़ किए देते हैं

फ़राग़ रोहवी

सूर-ओ-मंसूर-ओ-तूर अरे तौबा

फ़ानी बदायुनी

रोज़ है दर्द-ए-मोहब्बत का निराला अंदाज़

फ़ानी बदायुनी

यूँ नज़्म-ए-जहाँ दरहम-ओ-बरहम न हुआ था

फ़ानी बदायुनी

संग-ए-दर देख के सर याद आया

फ़ानी बदायुनी

क़सम न खाओ तग़ाफ़ुल से बाज़ आने की

फ़ानी बदायुनी

मर के टूटा है कहीं सिलसिला-क़ैद-ए-हयात

फ़ानी बदायुनी

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