आंख Poetry (page 13)

जब आफ़्ताब की आग इस ज़मीं को चाटेगी

शारिक़ जमाल

अब किसी शाख़ पे हिलता नहीं पत्ता कोई

शरीफ़ कुंजाही

दिल में मिरे जिगर में मिरे आँख में मिरी

शरफ़ मुजद्दिदी

सब्ज़ सूरज की किरन

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

अँधेरी शब से एक ला-हासिल

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

मौज-ए-दरिया को पिएँ क्या ग़म-ए-ख़म्याज़ा करें

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

मैं सोचता हूँ कभी ऐसा हो न जाए कहीं

शम्स तबरेज़ी

बहार-ए-ज़ीस्त की महरूमियाँ अरे तौबा

शम्स फ़र्रुख़ाबादी

तू याद आया और मिरी आँख भर गई

शमीम तारिक़

नींद आँखों में समो लूँ तो सियह रात कटे

शमीम तारिक़

तिलिस्म-ए-सफ़र

शमीम क़ासमी

ये ख़ुशी ग़म-ए-ज़माना का शिकार हो न जाए

शमीम करहानी

उन का वादा बदल गया है

शमीम करहानी

ग़म दो आलम का जो मिलता है तो ग़म होता है

शमीम करहानी

हर शय तुझी को सामने लाए तो क्या करूँ

शमीम जयपुरी

आज मेरी शब-ए-फ़ुर्क़त की सहर आई है

शमीम जयपुरी

आज जीने की कुछ उम्मीद नज़र आई है

शमीम जयपुरी

नीले पीले सियाह सुर्ख़ सफ़ेद सब थे शामिल इसी तमाशे में

शमीम हनफ़ी

क्यूँ परेशान हुआ जाता है दिल क्या जाने

शमीम हनफ़ी

अब क़ैस है कोई न कोई आबला-पा है

शमीम हनफ़ी

मुझ को तिरे सुलूक से कोई गिला न था

शकील शम्सी

किसी की आँख से आँसू टपक रहे होंगे

शकील शम्सी

न कोई ख़्वाब कमाया न आँख ख़ाली हुई

शकील जमाली

क्या हसीं ख़्वाब मोहब्बत ने दिखाया था हमें

शकील बदायुनी

कोई आरज़ू नहीं है कोई मुद्दआ' नहीं है

शकील बदायुनी

ख़ाना-ए-उम्मीद बे-नूर-ओ-ज़िया होने को है

शकील बदायुनी

कैसे कह दूँ की मुलाक़ात नहीं होती है

शकील बदायुनी

आँख से आँख मिलाता है कोई

शकील बदायुनी

आज फिर गर्दिश-ए-तक़दीर पे रोना आया

शकील बदायुनी

संग थे पिघले तो पानी हो गए

शकील आज़मी

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