आंख Poetry (page 14)

क़दम उठे हैं तो धूल आसमान तक जाए

शकील आज़मी

परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है

शकील आज़मी

समझ सको तो ये तिश्ना-लबी समुंदर है

शकेब जलाली

साहिल तमाम अश्क-ए-नदामत से अट गया

शकेब जलाली

बद-क़िस्मती को ये भी गवारा न हो सका

शकेब जलाली

बे-आब-ओ-बे-ग्याह हुआ उस को छोड़ कर

शकेब अयाज़

बस वही लम्हा आँख देखेगी

शाइस्ता यूसुफ़

कब सुनी तुम ने रागनी मेरी

शाइस्ता सहर

जुनून-ए-इश्क़ की आमादगी ने कुछ न दिया

शाइस्ता सहर

खुल गई जिस की आँख मिस्ल-ए-हबाब

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मैं अपने दस्त पर शब ख़्वाब में देखा कि अख़गर था

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

जो मय-ख़ाने में जाता था क़दम रखते झिझकता था

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

चमन में दहर के हर गुल है कान की सूरत

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

औक़ात-ए-शैख़ गो कि सुजूद ओ क़याम है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

रदीफ़ क़ाफ़िया बंदिश ख़याल लफ़्ज़-गरी

शहज़ाद क़ैस

जो कुछ भी मेरे पास थी दौलत निगल गई

शहज़ाद हुसैन साइल

वो ख़ुश-नसीब थे जिन्हें अपनी ख़बर न थी

शहज़ाद अहमद

तुम्हारी आँख में कैफ़िय्यत-ए-ख़ुमार तो है

शहज़ाद अहमद

इस राह से गुज़रे थे कभी अहल-ए-नज़र भी

शहज़ाद अहमद

दिल ओ निगाह का ये फ़ासला भी क्यूँ रह जाए

शहज़ाद अहमद

आता है ख़ौफ़ आँख झपकते हुए मुझे

शहज़ाद अहमद

सोता जागता साया

शहज़ाद अहमद

हम कि इंसान नहीं आँखें हैं

शहज़ाद अहमद

दरख़्तों पर कोई पत्ता नहीं था

शहज़ाद अहमद

यूँ ख़ाक की मानिंद न राहों पे बिखर जा

शहज़ाद अहमद

उठीं आँखें अगर आहट सुनी है

शहज़ाद अहमद

सूरज की किरन देख के बेज़ार हुए हो

शहज़ाद अहमद

रुख़्सत हुआ तो आँख मिला कर नहीं गया

शहज़ाद अहमद

प्यार के रंग-महल बरसों में तय्यार हुए

शहज़ाद अहमद

न बस्तियों को अज़ीज़ रक्खें न हम बयाबाँ से लौ लगाएँ

शहज़ाद अहमद

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