बात Poetry (page 86)

किसी के नाम पे नन्हे दिए जलाते हुए

अज़लान शाह

दुनिया के लिए ज़हर न खालें कोई हम भी

अज़लान शाह

ये बात सच है कि मरना सभी को है लेकिन

अज़ीज़ुर्रहमान शहीद फ़तेहपुरी

अजीब कैफ़ियत आख़िर तलक रही दिल की

अज़ीज़ुर्रहमान शहीद फ़तेहपुरी

कैसे मुमकिन है कि हम दोनों बिछड़ जाएँगे

अज़ीज़ वारसी

तिरी तलाश में निकले हैं तेरे दीवाने

अज़ीज़ वारसी

ख़ुशी महसूस करता हूँ न ग़म महसूस करता हूँ

अज़ीज़ वारसी

इतने नज़दीक से आईने को देखा न करो

अज़ीज़ वारसी

इक हम कि उन के वास्ते महव-ए-फ़ुग़ाँ रहे

अज़ीज़ वारसी

परछाइयाँ

अज़ीज़ तमन्नाई

उसी ने साथ दिया ज़िंदगी की राहों में

अज़ीज़ तमन्नाई

दिल में वो दर्द उठा रात कि हम सो न सके

अज़ीज़ तमन्नाई

रसूल-ए-काज़िब

अज़ीज़ क़ैसी

उलझाओ का मज़ा भी तिरी बात ही में था

अज़ीज़ क़ैसी

जितने थे रंग हुस्न-ए-बयाँ के बिगड़ गए

अज़ीज़ क़ैसी

'नबील' ऐसा करो तुम भी भूल जाओ उसे

अज़ीज़ नबील

सुब्ह-सवेरे ख़ुशबू पनघट जाएगी

अज़ीज़ नबील

ख़याल-ओ-ख़्वाब का सारा धुआँ उतर चुका है

अज़ीज़ नबील

इस बार हवाओं ने जो बेदाद-गरी की

अज़ीज़ नबील

वही हिकायत-ए-दिल थी वही शिकायत-ए-दिल

अज़ीज़ लखनवी

तुम ने छेड़ा तो कुछ खुले हम भी

अज़ीज़ लखनवी

पैदा वो बात कर कि तुझे रोएँ दूसरे

अज़ीज़ लखनवी

जाम ख़ाली जहाँ नज़र आया

अज़ीज़ लखनवी

हिज्र की रात याद आती है

अज़ीज़ लखनवी

ग़लत है दिल पे क़ब्ज़ा क्या करेगी बे-ख़ुदी मेरी

अज़ीज़ लखनवी

एक ही ख़त में है क्या हाल जो मज़कूर नहीं

अज़ीज़ लखनवी

बेकार ये ग़ुस्सा है क्यूँ उस की तरफ़ देखो

अज़ीज़ लखनवी

उस ने सुन कर बात मेरी टाल दी

अज़ीज़ हैदराबादी

तिलिस्म-ए-शेवा-ए-याराँ खुला तो कुछ न हुआ

अज़ीज़ हामिद मदनी

सुलग रहा है उफ़ुक़ बुझ रही है आतिश-ए-महर

अज़ीज़ हामिद मदनी

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