बादल Poetry (page 6)

उड़ता हुआ इक बादल था

शाहिद अज़ीज़

यूँ उलझ कर रह गई है तार-ए-पैराहन में रात

शाहीन ग़ाज़ीपुरी

ग़ुंचा ग़ुंचा मौसम-ए-रंग-ए-अदा में क़ैद था

शाहीन बद्र

तलाश

शहाब जाफ़री

सर-ए-मिज़्गाँ ये नाले अब भी आँसू को तरसते हैं

शाह नसीर

बरसी हैं वो आँखें कि न बादल कभी बरसे

शफ़क़त तनवीर मिर्ज़ा

रुकूँ तो रुकता है चलने पे साथ चलता है

शफ़ीक़ सलीमी

सामने इक बे-रहम हक़ीक़त नंगी हो कर नाचती है

शबनम शकील

टूट के बादल फिर बरसा है

शबनम नक़वी

नज़्म

शबनम अशाई

दूर तक फैला हुआ पानी ही पानी हर तरफ़

शबाब ललित

दूर तक फैला हुआ पानी ही पानी हर तरफ़

शबाब ललित

अन-गिनत शादाब जिस्मों की जवानी पी गया

शबाब ललित

हब्स तारी है मुसलसल कैसा

शायर लखनवी

जहान-ए-रंग-ओ-बू में मुस्तक़िल तख़्लीक़-ए-मस्ती है

सीमाब अकबराबादी

धरती में भी रेंग रही है ख़ून की इक शिरयान

सय्यद नसीर शाह

ख़ून-ए-दिल से रह-ए-हस्ती को फ़रोज़ाँ कर लें

सत्यपाल जाँबाज़

सख़ावत का फ़रिश्ता

सरवत हुसैन

मैं तुम्हें याद कर रहा था

सरवत हुसैन

बहता हुआ पानी

सरवत हुसैन

कभी सुर्ख़ी से लिखता हूँ कभी काजल से लिखता हूँ

सरदार सलीम

डस्टबिन

साक़ी फ़ारुक़ी

मैं वही दश्त हमेशा का तरसने वाला

साक़ी फ़ारुक़ी

उदास चेहरे वाली ख़ूबसूरत लड़की के लिए एक नज़्म

सलमान सईद

हूँ मैं भी वही मेरा मुक़ाबिल भी वही है

सलीम शाहिद

अब शहर की और दश्त की है एक कहानी

सलीम शाहिद

ज़लील-ओ-ख़्वार होती जा रही है

सलीम मुहीउद्दीन

यहाँ वहाँ कुछ लफ़्ज़ हैं मेरे नज़्में ग़ज़लें तेरी हैं

सलीम मुहीउद्दीन

निकल गए हैं जो बादल बरसने वाले थे

सलीम अहमद

मैं सर छुपाऊँ कहाँ साया-ए-नज़र के बग़ैर

सलीम अहमद

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