बदन Poetry (page 35)

तिरे बदन के नए ज़ाविए बनाता हुआ

अशरफ़ सलीम

तिरे बदन के नए ज़ाविए बनाता हुआ

अशरफ़ सलीम

घटा जब रक़्स करती है तो उन की याद आती है

अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन

उठाओ संग कि हम में सनक बहुत है अभी

अशफ़ाक़ अंजुम

तेरे बदन की धूप से महरूम कब हुआ

अशअर नजमी

तेरे बदन की धूप से महरूम कब हुआ

अशअर नजमी

इंकिशाफ़-ए-ज़ात के आगे धुआँ है और बस

अशअर नजमी

रौनक़ तिरे कूचे की बढ़ाने चले आए

असग़र राही

अपने घर में मिरी तस्वीर सजाने वाले

असग़र राही

मैं गिरता हूँ

असग़र नदीम सय्यद

धूप-भरी अजरक

असग़र नदीम सय्यद

प्यासा रहा मैं बाला-क़दी के फ़रेब में

असग़र मेहदी होश

जला जला के दिए पास पास रखते हैं

असग़र मेहदी होश

सहरा से चले हैं सू-ए-गुलशन

असर लखनवी

नौ मंज़िला बिल्डिंग

असद मोहम्मद ख़ाँ

रवाँ है क़ाफ़िला-ए-जुस्तुजू किधर मेरा

असद जाफ़री

मिरे बदन पे ज़मानों की ज़ंग है लेकिन

असअ'द बदायुनी

तलब की राहों में सारे आलम नए नए से

असअ'द बदायुनी

हरीफ़ कोई नहीं दूसरा बड़ा मेरा

असअ'द बदायुनी

ख़ुदी के ज़ो'म में ऐसा वो मुब्तला हुआ है

अरशद महमूद अरशद

क्या कहूँ कितना फ़ुज़ूँ है तेरे दीवाने का दुख

अरशद जमाल 'सारिम'

बस कि इक लम्स की उम्मीद पे वारे हुए हैं

अरशद जमाल 'सारिम'

परतव-ए-रुख़ का तिरे दिल में गुज़र रहता है

अरशद अली ख़ान क़लक़

लुत्फ़-ए-बहार मुश्फ़िक़-ए-मन देखते चलो

अरशद अली ख़ान क़लक़

मुद्दतों घाव किए जिस के बदन पर हम ने

अरशद अब्दुल हमीद

रुकते हुए क़दमों का चलन मेरे लिए है

अरशद अब्दुल हमीद

मुझ को तक़दीर ने यूँ बे-सर-ओ-आसार किया

अरशद अब्दुल हमीद

न हर्फ़-ए-शौक़ न तर्ज़-ए-बयाँ से आती है

अरमान नज्मी

जाने किस आलम-ए-एहसास में खोए हुए हैं

अरमान नज्मी

वहाँ मैं नहीं थी

आरिफ़ा शहज़ाद

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