दीपक Poetry (page 34)

मेरा वतन

अर्श मलसियानी

दीवाली

अर्श मलसियानी

ख़ाना-ए-दिल में दाग़ जल न सका

अर्श मलसियानी

एहसास-ए-हुस्न बन के नज़र में समा गए

अर्श मलसियानी

दिमाग़-ओ-दिल पे हो क्या असर अँधेरे का

अरमान नज्मी

छुपाए दिल में हम अक्सर तिरी तलब भी चले

आरिफ़ अब्दुल मतीन

चाँद मेरे घर में उतरा था कहीं डूबा न था

आरिफ़ अब्दुल मतीन

कितने सवाल सब की निगाहों में रख दिए

अक़ील दानिश

अज़ाब-ए-हमसफ़री से गुरेज़ था मुझ को

अनवर सिद्दीक़ी

काफ़ी नहीं ख़ुतूत किसी बात के लिए

अनवर शऊर

ज़ोर से आँधी चली तो बुझ गए सारे चराग़

अनवर सदीद

वक़्त जब करवटें बदलता है

अनवर साबरी

कहीं और ही चलना होगा

अनवर नदीम

मैं जिस चराग़ से बैठा था लौ लगाए हुए

अंजुम सलीमी

कहो हवा से कि इतनी चराग़-पा न फिरे

अंजुम सलीमी

तन्हाई का सफ़रनामा

अंजुम सलीमी

सरगोशी

अंजुम सलीमी

पुर्सा

अंजुम सलीमी

गिर्या

अंजुम सलीमी

काग़ज़ था मैं दिए पे मुझे रख दिया गया

अंजुम सलीमी

हवा का तख़्त बिछाता हूँ रक़्स करता हूँ

अंजुम सलीमी

दिन हो कि रात, कुंज-ए-क़फ़स हो कि सेहन-ए-बाग़

अंजुम रूमानी

दिन हो कि रात कुंज-ए-क़फ़स हो कि सेहन-ए-बाग़

अंजुम रूमानी

शब-ए-फ़िराक़ अचानक ख़याल आया मुझे

अंजुम ख़याली

कुछ तो नया किया है हवा ने पता करो

अंजुम बाराबंकवी

दिलों से ख़ौफ़ के आसेब-ओ-जिन निकालता है

अंजुम बाराबंकवी

परछाइयों के शहर ज़मीं पर बसा दिए

अंजुम अंसारी

हमेशा किसी इम्तिहाँ में रहा

अनीस अशफ़ाक़

कोई अदा-शनास-ए-मोहब्बत हमें बताए

अंदलीब शादानी

ज़िंदगी गो कुश्ता-ए-आलाम है

आनंद नारायण मुल्ला

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