दर Poetry (page 66)

लुत्फ़ वो इश्क़ में पाए हैं कि जी जानता है

दाग़ देहलवी

इस अदा से वो जफ़ा करते हैं

दाग़ देहलवी

इधर देख लेना उधर देख लेना

दाग़ देहलवी

होश आते ही हसीनों को क़यामत आई

दाग़ देहलवी

देख कर जौबन तिरा किस किस को हैरानी हुई

दाग़ देहलवी

भवें तनती हैं ख़ंजर हाथ में है तन के बैठे हैं

दाग़ देहलवी

नज़रों के गिर्द यूँ तो कोई दायरा न था

डी. राज कँवल

ये हादसा मिरी आँखों से गर नहीं होता

चित्रांश खरे

काएनात-ए-आरज़ू में हम बसर करने लगे

चित्रांश खरे

जब सर-ए-बाम वो ख़ुर्शीद-जमाल आता है

चरख़ चिन्योटी

बज़्म-ए-जानाँ में मोहब्बत का असर देखेंगे

चरख़ चिन्योटी

बज़्म-ए-जानाँ में मोहब्बत का असर देखेंगे

चरख़ चिन्योटी

फ़ज़ा-ए-आदमियत को सँवरने ही नहीं देते

चरण सिंह बशर

जंग

चन्द्रभान ख़याल

गुम-शुदा आदमी का इंतिज़ार

चन्द्रभान ख़याल

वो काश मान लेता कभी हम-सफ़र मुझे

चाँदनी पांडे

दिलकशी नाम को भी आलम-ए-इम्काँ में नहीं

चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी

रामायण का एक सीन

चकबस्त ब्रिज नारायण

मर्सिया गोपाल कृष्ण गोखले

चकबस्त ब्रिज नारायण

ख़ाक-ए-हिंद

चकबस्त ब्रिज नारायण

फ़ना का होश आना ज़िंदगी का दर्द-ए-सर जाना

चकबस्त ब्रिज नारायण

अगर दर्द-ए-मोहब्बत से न इंसाँ आश्ना होता

चकबस्त ब्रिज नारायण

वही लफ़्ज़ हैं दुर्र-ए-बे-बहा मिरे वास्ते

बुशरा हाश्मी

अभी बादलों का सफ़र कहाँ मिरे मेहरबाँ

बुशरा हाश्मी

ब-ज़ाहिर तुझ से मिलने का कोई इम्काँ नहीं है

बुशरा फर्रुख

मेरे ख़ामोश ख़ुदा

बुशरा एजाज़

संग को छोड़ के तू ने कभी सोचा ही नहीं

बबल्स होरा सबा

मिरी ज़िंदगी है तन्हा तुम्हें कुछ असर तो होता

बबल्स होरा सबा

इस क़दर बढ़ गई वहशत तिरे दीवाने की

बूम मेरठी

अगर दुश्मन की थोड़ी सी मरम्मत और हो जाती

बूम मेरठी

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