दर Poetry (page 89)

इक उम्र भटकते रहे घर ही नहीं आया

अख़तर शाहजहाँपुरी

इक अजब आलम है दिल का ज़िंदगी की राह में

अख्तर सईदी

तुम हो या छेड़ती है याद-ए-सहर कोई तो है

अख़्तर सईद ख़ान

सुन रहा हूँ बे-सदा नग़्मा जो मैं बा-चश्म-ए-तर

अख़्तर सईद ख़ान

मुद्दत से लापता है ख़ुदा जाने क्या हुआ

अख़्तर सईद ख़ान

गुज़रना है जी से गुज़र जाइए

अख़्तर सईद ख़ान

तुम्हारे होने का शायद सुराग़ पाने लगे

अख़्तर रज़ा सलीमी

रिवायात की तख़्लीक़

अख़्तर पयामी

कुछ इस तरह के बहारों ने गुल खिलाए हैं

अख़तर मुस्लिमी

तुम अपनी ज़बाँ ख़ाली कर के ऐ नुक्ता-वरो पछताओगे

अख़तर मुस्लिमी

चाँदनी के हाथ भी जब हो गए शल रात को

अख़तर इमाम रिज़वी

मैं ग़ैर-महफ़ूज़ रात से डरता हूँ

अख़्तर हुसैन जाफ़री

इम्तिनाअ का महीना

अख़्तर हुसैन जाफ़री

इक हर्फ़-ए-फ़सुर्दा दाग़ में है

अख़्तर हुसैन जाफ़री

तिलिस्म-ए-गुम्बद-ए-बे-दर किसी पे वा न हुआ

अख़्तर होशियारपुरी

शायान-ए-ज़िंदगी न थे हम मो'तबर न थे

अख़्तर होशियारपुरी

शाम तन्हाई धुआँ उठता बराबर देखते

अख़्तर होशियारपुरी

शाख़ों पे ज़ख़्म हैं कि शगूफ़े खिले हुए

अख़्तर होशियारपुरी

क़र्या-ए-जाँ से गुज़र कर हम ने ये देखा भी है

अख़्तर होशियारपुरी

फिर ये हुआ कि लोग दरीचों से हट गए

अख़्तर होशियारपुरी

मंज़िलों के फ़ासले दीवार-ओ-दर में रह गए

अख़्तर होशियारपुरी

मैं ने यूँ देखा उसे जैसे कभी देखा न था

अख़्तर होशियारपुरी

क्या पूछते हो मुझ से कि मैं किस नगर का था

अख़्तर होशियारपुरी

कुछ नक़्श हुवैदा हैं ख़यालों की डगर से

अख़्तर होशियारपुरी

किसे ख़बर जब मैं शहर-ए-जाँ से गुज़र रहा था

अख़्तर होशियारपुरी

इक नूर था कि पिछले पहर हम-सफ़र हुआ

अख़्तर होशियारपुरी

दश्त-दर-दश्त अक्स-ए-दर है यहाँ

अख़्तर होशियारपुरी

बजा कि दुश्मन-ए-जाँ शहर-ए-जाँ के बाहर है

अख़्तर होशियारपुरी

यूँ ख़ुद को ख़्वाहिशात के अक्सर दिखाए रंग

अख़तर बस्तवी

ज़िंदगी होगी मिरी ऐ ग़म-ए-दौराँ इक रोज़

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.