दवा Poetry (page 6)

मालूम है वो मुझ से ख़फ़ा है भी नहीं भी

राशिद आज़र

हैं सर-निगूँ जो ताना-ए-ख़ल्क़-ए-ख़ुदा से हम

रशीद रामपुरी

मेरे लिए तो हर्फ़-ए-दुआ हो गया वो शख़्स

रशीद क़ैसरानी

दिखा कर ज़हर की शीशी कहा 'रंजूर' से उस ने

रंजूर अज़ीमाबादी

जनाज़ा धूम से उस आशिक़-ए-जाँ-बाज़ का निकले

रंजूर अज़ीमाबादी

तुझ से मैं मुझ से आश्ना तुम हो

रमेश कँवल

मेरे तसव्वुरात में अब कोई दूसरा नहीं

राम कृष्ण मुज़्तर

अजब नहीं है मुआलिज शिफ़ा से मर जाएँ

राकिब मुख़्तार

न चारागर की ज़रूरत न कुछ दवा की है

राजेन्द्र कृष्ण

कहीं से मौत को लाओ कि ग़म की रात कटे

राजेन्द्र कृष्ण

बे-वफ़ाओं को वफ़ाओं का ख़ुदा हम ने कहा

राजेन्द्र नाथ रहबर

सफ़र में कोई रुकावट नहीं गदा के लिए

रईस अमरोहवी

अपनी ख़बर, न उस का पता है, ये इश्क़ है

इरफ़ान सत्तार

रस्म-ए-उल्फ़त से है मक़्सूद-ए-वफ़ा हो कि न हो

इरफ़ान अहमद मीर

गली से तेरी जो टुक हो के आदमी निकले

इंशा अल्लाह ख़ान

मैं सारी उम्र अहद-ए-वफ़ा में लगा रहा

इमरान हुसैन आज़ाद

वस्ल में ज़िक्र ग़ैर का न करो

इमदाद अली बहर

शोर है उस सब्ज़ा-ए-रुख़्सार का

इमदाद अली बहर

मैं उस बुत का वस्ल ऐ ख़ुदा चाहता हूँ

इमदाद अली बहर

हमीं नाशाद नज़र आते हैं दिल-शाद हैं सब

इमदाद अली बहर

चूर सदमों से हो बईद नहीं

इमदाद अली बहर

बद-तालई का इलाज क्या हो

इमदाद अली बहर

आरास्तगी बड़ी जिला है

इमदाद अली बहर

दर्द अब दिल की दवा हो जैसे

इफ़्तिख़ार आज़मी

इस शहर के लोगों पे ख़त्म सही ख़ु-तलअ'ती-ओ-गुल-पैरहनी

इब्न-ए-इंशा

हमें तुम पे गुमान-ए-वहशत था हम लोगों को रुस्वा किया तुम ने

इब्न-ए-इंशा

दिल को ग़म रास है यूँ गुल को सबा हो जैसे

होश तिर्मिज़ी

दिल को ग़म रास है यूँ गुल को सबा हो जैसे

होश तिर्मिज़ी

हाल बीमार का पूछो तो शिफ़ा मिलती है

हीरा लाल फ़लक देहलवी

उस का हाल-ए-कमर खुला हमदम

हातिम अली मेहर

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